मध्य प्रदेश की राजधानी में अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे जूनियर डॉक्टरों (जूडा) के उग्र विरोध-प्रदर्शन ने शहर की जीवनरेखा को पूरी तरह थाम दिया। डॉक्टरों ने नए और पुराने भोपाल को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त मुख्य संपर्क मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। पीक ऑवर्स के दौरान हुए इस आकस्मिक मार्ग अवरोध से रोजमर्रा के काम पर निकले राहगीर, स्कूल बसें, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और आपातकालीन एंबुलेंस घंटों तक जाम में फंसे रहे।
प्रदर्शनकारियों की अचानक हुई इस नाकेबंदी के चलते पुलिस और ट्रैफिक प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
नए और पुराने भोपाल का संपर्क कटा, रेंगते रहे वाहन गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल से जुड़े जूनियर डॉक्टरों ने सुबह से ही लामबंद होकर मार्च निकाला और नए व पुराने शहर के मुख्य ट्रांजिट कॉरिडोर पर डेरा डाल दिया:
- लाइफलाइन हुई ठप: मोती मस्जिद, रेतघाट, कमला पार्क और पॉलिटेक्निक को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग के अवरुद्ध होने से दोनों हिस्सों के बीच का यातायात पूरी तरह कट गया।
- एंबुलेंस और इमरजेंसी वाहन भी फंसे: जाम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुराने शहर के अस्पतालों की ओर जाने वाली कई एंबुलेंस सायरन बजाते हुए भीड़ में फंसी रहीं, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बमुश्किल मशक्कत के बाद निकाला गया।
- वैकल्पिक मार्गों पर भी दबाव: ट्रैफिक पुलिस ने आनन-फानन में वाहनों को वीआईपी रोड और लिंक रोड की ओर डायवर्ट करने का प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक दबाव के कारण लिंक मार्गों पर भी गाड़ियां चींटी की चाल से रेंगती नजर आईं।
जनता में आक्रोश, पुलिस-प्रशासन से तीखी नोकझोंक घंटों जाम में फंसे आम नागरिकों का गुस्सा भी खुलकर सामने आया। कई वाहन चालकों और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। लोगों का कहना था कि डॉक्टरों को अपनी बात शासन तक पहुंचाने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आम जनता को बंधक बनाकर इस तरह परेशान करना कतई उचित नहीं है।
अधिकारियों ने दी समझाइश, वैकल्पिक रूट से बहाल कराया ट्रैफिक स्थिति तनावपूर्ण होते देख जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे:
- पुलिस अफसरों ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से बातचीत कर सड़क खाली करने और ज्ञापन सौंपकर रास्ता खोलने की अपील की।
- काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करने की चेतावनी देकर मार्ग के एक हिस्से से वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू कराई।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से स्टाइपेंड वृद्धि, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी मेडिकल सुविधाओं को लेकर सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
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