मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (Barkatullah University – BU) अपनी परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की घोर लचर कार्यशैली को लेकर एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। विश्वविद्यालय से संबद्ध स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और विभिन्न वोकेशनल/प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं संपन्न हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक कई पाठ्यक्रमों के अंतिम परिणाम घोषित नहीं कर सका है। रिजल्ट जारी न होने और अंकसूचियां अटके होने के कारण हजारों छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक करियर गंभीर संकट में फंस गया है।
नतीजों में इस असाधारण देरी के चलते विद्यार्थी न तो अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आगामी सत्रों के लिए प्रवेश ले पा रहे हैं और न ही परिणाम के अभाव में सरकारी व गैर-सरकारी नौकरियों के भर्ती आवेदनों में शामिल हो पा रहे हैं।
छात्रों का आक्रोश: प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद भी सिर्फ खोखले आश्वासन विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पर आए दिन विभिन्न छात्र संगठनों और सामान्य विद्यार्थियों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं:
- समय पर मूल्यांकन न होना: छात्रों का आरोप है कि कॉपियों के मूल्यांकन (Evaluation) और डेटा फीडिंग का काम महीनों तक ठप पड़ा रहता है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक और जिम्मेदार अधिकारी हर बार “जल्द परिणाम घोषित करने” का औपचारिक आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
- एजेंसी और सिस्टम का विवाद: सूत्रों के अनुसार, रिजल्ट तैयार करने और ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा अपलोड करने वाली निजी एजेंसी के अनुबंध और भुगतान को लेकर चल रहे विवादों का सीधा खामियाजा निर्दोष विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
- गलत परिणामों और एटीकेटी (ATKT) का डर: जिन पाठ्यक्रमों के आंशिक परिणाम हाल ही में जारी किए गए हैं, उनमें भी उपस्थित छात्रों को अनुपस्थित (Absent) दर्शाने या शून्य अंक देने जैसी भारी तकनीकी त्रुटियां सामने आई हैं, जिसके समाधान के लिए छात्र विश्वविद्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
करियर पर मंडराया संकट: न डिग्री, न जॉब का मौका परिणामों में हो रही अत्यधिक देरी से अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ गई है:
- उच्च शिक्षा से वंचित: कई छात्र-छात्राओं का चयन राष्ट्रीय स्तर के उच्च शिक्षण संस्थानों या अन्य विश्वविद्यालयों में हो चुका था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम वर्ष की मार्कशीट और डिग्री प्रस्तुत न कर पाने के कारण उनके प्रवेश रद्द होने की नौबत आ गई है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की पात्रता पर असर: विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों, कर्मचारी चयन आयोग और बैंकिंग सेवाओं की भर्तियों में अंतिम परिणाम अनिवार्य होने के कारण पात्र युवा आवेदन करने से चूक रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई और उच्च शिक्षा विभाग की चुप्पी विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) के नए क्रेडिट सिस्टम, आंतरिक मूल्यांकन (Internal Marks) कॉलेजों द्वारा देरी से भेजने और तकनीकी सर्वर के अपग्रेडेशन के चलते कुछ संकायों के परिणामों में समय लगा है। प्रशासन का दावा है कि पेंडिंग रिजल्ट्स को चरणबद्ध तरीके से अगले कुछ हफ्तों में आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।
हालांकि, छात्रों का कहना है कि सत्र को नियमित करने और परीक्षा कैलेंडर का कड़ाई से पालन कराने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
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यह वीडियो रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि कैसे परीक्षा परिणामों में महीनों की देरी और मार्कशीट की गड़बड़ियों के कारण राजधानी के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को विवश हैं।












