विमानन इतिहास के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक ‘एआई-171’ (AI-171) क्रैश की इनसाइड स्टोरी अब सामने आई है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली तबाही के बीच चमत्कार, अदम्य जिजीविषा और असाधारण डॉक्टरी कौशल की एक अभूतपूर्व मिसाल है। हवा में तकनीकी खराबी के बाद क्रैश हुए इस अभागे विमान में सवार दर्जनों यात्रियों में से केवल एक शख्स की जान बच सकी। इस भयावह हादसे के ‘लोन सर्वाइवर’ (इकलौते जीवित बचे यात्री) को गंभीर रूप से झुलसी और मरणसन्न अवस्था में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां ‘मेडिकल हीरोज’ ने अपनी पूरी ताकत झोंककर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।
खौफनाक मंजर: जब मलबे से मिली जिंदगी की आखिरी सांस रेस्क्यू टीम के मुताबिक, जब एआई-171 का मलबा धू-धू कर जल रहा था, तब चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और खामोशी का साया था। लेकिन मलबे के एक ढह चुके हिस्से के नीचे से टीम को एक घायल यात्री मिला, जिसकी नब्ज बेहद कमजोर लेकिन चल रही थी। मल्टिपल फ्रैक्चर, अंदरूनी चोटों और करीब 60 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके इस सर्वाइवर को तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर शिफ्ट किया गया। अस्पताल के डॉक्टरों के लिए यह जिंदगी और मौत के बीच एक ऐसी रेस थी, जिसमें उनके पास गंवाने के लिए एक सेकंड भी नहीं था।
48 घंटे का महा-ऑपरेशन और ‘मेडिकल हीरोज’ का चमत्कार अहमदाबाद सिविल अस्पताल के बर्न यूनिट, प्लास्टिक सर्जनों, ऑर्थोपेडिक और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स की एक संयुक्त टीम ने लगातार कई घंटों तक चले जटिल ऑपरेशनों को अंजाम दिया। वेंटिलेटर सपोर्ट पर फेफड़ों के संक्रमण से लेकर कार्डियक अरेस्ट के खतरों से जूझते हुए डॉक्टरों ने न केवल उसकी बर्न इंजरी को स्टेबलाइज किया, बल्कि इन्फेक्शन को फैलने से रोका। सिविल अस्पताल के बर्न विभाग के विभागाध्यक्ष ने बताया कि यह उनके पूरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण केस था। आज वह इकलौता सर्वाइवर खतरे से बाहर है और धीरे-धीरे रिकवर हो रहा है। इस चमत्कार ने अस्पताल के डॉक्टरों को देश के सामने असली ‘मेडिकल हीरोज’ के रूप में लाकर खड़ा कर दिया है।

















