देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नृत्य कला को समर्पित ‘कलांजलि कलोत्सव’ में एक ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भव्य सांस्कृतिक महोत्सव के मंच पर जब 108 शास्त्रीय नर्तकियों (Dancers) ने एक सुर, एक ताल और एक लय में ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति दी, तो पूरा सभागार देशभक्ति के जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कला और राष्ट्रभक्ति के इस अभूतपूर्व समागम ने इस वर्ष के कलोत्सव को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।
विविध शास्त्रीय शैलियों का मंच पर दिखा अद्भुत समन्वय इस महा-प्रस्तुति की सबसे खास बात यह थी कि इसमें देश की विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। भारतनाट्यम, कथक, ओडिसी और कुचिपुड़ी की वेशभूषा में सजी 108 नर्तकियों ने जब एक साथ मंच संभाला, तो ऐसा लगा मानो पूरा भारत एक ही मंच पर सिमट आया हो। ‘वंदे मातरम’ के कालजयी गीतों पर उनकी हस्तमुद्राओं, पदचालन और चेहरे के भावों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को नृत्य के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस कोरियोग्राफी को तैयार करने के लिए महीनों तक कड़ा अभ्यास किया गया था, जो मंच पर साफ दिखाई दिया।
सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का अनूठा प्रयास ‘कलांजलि कलोत्सव’ के आयोजकों ने बताया कि इस अनूठी प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की ताकत से परिचित कराना और कला के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश देना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और कला समीक्षकों ने इस सामूहिक नृत्य की जमकर सराहना की और इसे कला के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान बताया। इस शानदार और गरिमापूर्ण प्रस्तुति के समापन पर सभी 108 कलाकारों को उनकी इस अद्वितीय कला साधना के लिए विशेष सम्मान से नवाजा गया।

















