मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित निजी शिक्षण संस्थान आरकेडीएफ (RKDF) ग्रुप से जुड़े बहुचर्चित फर्जी मार्कशीट और परीक्षाओं में डमी उम्मीदवार (मुन्ना भाई) बैठाने के गंभीर आपराधिक मामले में प्रमोटर कपूर परिवार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। पुलिसिया कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी की आशंका के बीच संस्थान के कर्ताधर्ताओं ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Jabalpur High Court) का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें मामले की अगली सुनवाई तक के लिए गिरफ्तारी से फौरी (अंतरिम) राहत मिल गई है।
अदालत ने पुलिस और जांच एजेंसी को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ फिलहाल कोई भी दंडात्मक व कठोर कदम (No Coercive Action) न उठाने का निर्देश दिया है, साथ ही याचिकाकर्ताओं को जांच में पूर्ण सहयोग करने का आदेश भी दिया है।
क्या है पूरा मामला? (डमी अभ्यर्थी और फर्जी डिग्रियों का खेल)
आरकेडीएफ संस्थान से जुड़ा यह मामला तब सुर्खियों में आया जब तकनीकी व उच्च शिक्षा की विभिन्न परीक्षाओं में वास्तविक छात्रों की जगह ‘सॉल्वर’ और डमी परीक्षार्थियों (मुन्ना भाई) को बैठाने के रैकेट का पर्दाफाश हुआ:
- डमी परीक्षार्थियों की एंट्री: पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया था कि संस्थान द्वारा आयोजित या संबद्ध कुछ परीक्षाओं में पास कराने के एवज में मोटी रकम लेकर बाहरी मेधावी सॉल्वरों को मूल परीक्षार्थियों के स्थान पर बैठाया गया।
- फर्जी मार्कशीट व डिग्रियों का वितरण: जांच एजेंसियों ने इस बात के भी प्रमाण जुटाए कि बिना कक्षाएं लगाए और बिना परीक्षा दिए बैकडेट में डिग्रियां, डिप्लोमा और अंकसूचियां (मार्कशीट) जारी करने का एक समानांतर रैकेट चलाया जा रहा था।
- एफआईआर और गिरफ्तारी का डर: पुलिस ने इस नेटवर्क के खुलासे के बाद धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने (Forgery) और परीक्षा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच का दायरा जब प्रबंधन और कपूर परिवार के सदस्यों तक पहुंचा, तो गिरफ्तारी की आशंका के चलते प्रबंधन ने अग्रिम कानूनी संरक्षण की मांग की।
हाईकोर्ट में क्या रही दलीलें?
हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष कपूर परिवार और संस्थान प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा:
- दुरुपयोग और दुर्भावना का आरोप: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि पूरे मामले में प्रबंधन को दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया जा रहा है और आपराधिक षड्यंत्र में शीर्ष प्रबंधन की कोई सीधी संलिप्तता नहीं है।
- जांच में सहयोग का भरोसा: वकीलों ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में पूरा सहयोग देने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
- अदालत का अंतरिम निर्देश: दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य शासन और जांच एजेंसी को नोटिस जारी कर केस डायरी और विस्तृत स्थिति रिपोर्ट तलब की है तथा अगली तारीख तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
उच्च शिक्षा जगत में हड़कंप, पहले भी विवादों में रहा है समूह
आरकेडीएफ समूह का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी मेडिकल, नर्सिंग, फार्मेसी और तकनीकी पाठ्यक्रमों में मान्यता, सीटों के आवंटन और फर्जी दस्तावेजों को लेकर समूह जांच एजेंसियों और नियामकों (UGC, AICTE) के निशाने पर आ चुका है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट से मिली यह राहत महज अंतरिम है और पुलिस द्वारा विस्तृत केस डायरी पेश किए जाने के बाद अदालत अंतिम फैसला तय करेगी।
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