पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में उस वक्त बड़ा सियासी भूचाल आ गया जब कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को 28 साल बाद पुनः कांग्रेस में शामिल होने का खुला न्योता दे दिया। दिल्ली में ‘INDIA’ ब्लॉक की साझा बैठक और सोनिया गांधी के साथ ममता बनर्जी की गर्मजोशी भरी तस्वीरों के ठीक बाद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अगर ममता बनर्जी अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में वापस लौटती हैं, तो बंगाल कांग्रेस उन्हें अपना नेता स्वीकार करने और उनके नेतृत्व में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1 जनवरी 1998 को तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व से मतभेदों के चलते पार्टी छोड़कर ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) का गठन किया था। उन्होंने 2011 में वाम मोर्चे (Left Front) के 34 वर्षों के ऐतिहासिक शासन को उखाड़ फेंका और करीब 15 वर्षों तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहीं।
“पुरानी बातें भूलें, बंगाल में आपके नेतृत्व में काम करेंगे” — अधीर का न्योता
अधीर रंजन चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा:
- कांग्रेस ने हमेशा दिया साथ: अधीर ने कहा कि जब-जब ममता बनर्जी पर राजनीतिक संकट आया, उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस और सोनिया गांधी का रुख किया। अब जब वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, तो उन्हें अलग पार्टी चलाने के बजाय अपनी मूल पार्टी में वापस आ जाना चाहिए।
- नेतृत्व स्वीकार करने का ऐलान: उन्होंने कहा, “अगर ममता बनर्जी कांग्रेस में लौटती हैं, तो बंगाल के सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता उन्हें अपना नेता मान लेंगे। हम उनके नेतृत्व में एकजुट होकर भाजपा से लड़ने को तैयार हैं।”
- ‘बोझ’ पीछे छोड़ने की शर्त: हालांकि, अधीर ने एक सियासी शर्त भी जोड़ दी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अपना ‘बोझ’ पीछे छोड़कर आना होगा। राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की ओर सीधा परोक्ष इशारा माना जा रहा है।
TMC की दो टूक: आधिकारिक प्रस्ताव पर ही चर्चा, अभिषेक के बिना फैसला नामुमकिन
अधीर रंजन चौधरी के इस सियासी ऑफर पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने आधिकारिक रुख स्पष्ट किया:
- व्यक्तिगत राय या पार्टी का रुख?: सौगत रॉय ने कहा, “अधीर रंजन चौधरी ने वही कहा जो उन्हें ठीक लगा। यह उनका व्यक्तिगत बयान है। टीएमसी आज एक स्वतंत्र और स्थापित राजनीतिक दल है। यदि कांग्रेस आलाकमान की ओर से कोई आधिकारिक और औपचारिक प्रस्ताव आता है, तभी हमारी पार्टी उस पर विचार करेगी।”
- अभिषेक बनर्जी के बिना कोई फैसला नहीं: अधीर के ‘बोझ’ वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए सौगत रॉय ने साफ किया कि पार्टी से जुड़ा कोई भी निर्णय अभिषेक बनर्जी के बिना नहीं लिया जा सकता। अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और हमारे सर्वमान्य नेता हैं।
बंगाल में बदली सियासी परिस्थितियां: TMC में टूट और नंदीग्राम का असर
अधीर रंजन के इस अप्रत्याशित न्योते के पीछे पश्चिम बंगाल का हालिया सियासी घटनाक्रम माना जा रहा है:
- विधानसभा में टूट और बगावत: हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बीच टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने अलग गुट बनाकर विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता हासिल की है, जिससे ममता गुट और बागी गुट के बीच पार्टी के नाम और निशान को लेकर कानूनी जंग छिड़ी हुई है।
- उपचुनावों में कांग्रेस को समर्थन: नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार की अनुपस्थिति के बाद ममता गुट ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। इसी के आधार पर अधीर रंजन ने रेजीनगर में भी कांग्रेस को समर्थन देने और अंततः पार्टी का विलय करने की वकालत की।
भाजपा का तंज: “TMC का राजनीतिक औचित्य खत्म हो चुका”
इस पूरे घटनाक्रम पर पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने तीखा प्रहार किया है। भाजपा ने कहा कि टीएमसी का जन्म ही माकपा (CPM) से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। अब जब टीएमसी सत्ता से बाहर हो चुकी है और बगावत से जूझ रही है, तो उसका राजनीतिक मकसद पूरी तरह खत्म हो चुका है। वे कांग्रेस में जाएं या कहीं और, भाजपा उनके हर गठबंधन को हराने के लिए तैयार है।
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