मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खुद को ट्रेनी आईएएस और पर्यटन विकास निगम (MPT) में एडिशनल डायरेक्टर बताकर नौकरी व होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाली शातिर ‘फर्जी आईएएस’ तृप्ति सिंह के मामले में जांच अब पुलिस महकमे के बेहद करीब पहुंच गई है। भोपाल पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट में अयोध्या नगर के तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) महेश लिल्हारे के भाई रोहित लिल्हारे को थाने बुलाकर घंटों गहन पूछताछ की है।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), मोबाइल चैट्स और मेमोरेंडम में रोहित के मोबाइल नंबर व लेन-देन के खुलासे के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रोहित लिल्हारे महज तृप्ति के झांसे में आया एक पीड़ित (शिकायतकर्ता) था या फिर वह इस सिंडिकेट का एक सक्रिय साझीदार बन चुका था।
कैसे हुई थी मुलाकात? थाने में टीआई ने कराया था ‘UPSC गाइडेंस’ के लिए परिचय
पुलिस अनुसंधान और दर्ज बयानों के अनुसार, तृप्ति सिंह और रोहित लिल्हारे के बीच संपर्क की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले हुई थी:
- अयोध्या नगर थाने पहुंची थी तृप्ति: तृप्ति सिंह अपने ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी से जुड़ी एक शिकायत लेकर अयोध्या नगर थाने पहुंची थी। वहां उसने खुद को ‘लास्ट बैच’ की चयनित आईएएस अधिकारी और मप्र पर्यटन विकास निगम में उच्च पदस्थ अफसर के रूप में पेश किया।
- भाई के लिए मांगा था मार्गदर्शन: उस दौरान थाने में टीआई महेश लिल्हारे के छोटे भाई रोहित लिल्हारे भी मौजूद थे, जो स्वयं संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। एक कथित युवा महिला आईएएस को देखकर टीआई ने अपने भाई रोहित को तैयारी से जुड़े टिप्स और करियर गाइडेंस लेने के लिए तृप्ति से मिलवाया था।
- यहीं से बुना गया जाल: इसी पहली औपचारिक मुलाकात के बाद तृप्ति ने रोहित से नजदीकियां बढ़ाईं और प्रशासनिक रौब दिखाकर धीरे-धीरे उसे अपने प्रभाव में ले लिया।
पुलिसिया सुरक्षा लेकर सरकारी दफ्तरों का ‘निरीक्षण’
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि तृप्ति सिंह सिर्फ जुबानी रौब नहीं जमाती थी, बल्कि उसने बाकायदा सरकारी तंत्र को भी भ्रमित कर दिया था:
- वीडियो फुटेज से खुलासा: अयोध्या नगर क्षेत्र के एक सरकारी दफ्तर का वीडियो सामने आया है, जिसमें तृप्ति सिंह एक वरिष्ठ आईएएस अफसर की तरह फाइलों की जांच और कार्यालय का ‘निरीक्षण’ करती दिख रही है।
- साथ में तैनात था पुलिस बल: आरोप है कि इस तथाकथित निरीक्षण के दौरान उसके साथ वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तौर पर मौजूद थे। जांच एजेंसियां इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि फर्जी अफसर को यह पुलिस बल किस स्तर से और किसके निर्देश पर उपलब्ध कराया गया था।
रोहित लिल्हारे की भूमिका पर क्या हैं सवाल? (शिकायतकर्ता या साझीदार)
इस मामले में सबसे बड़ा पेंच रोहित लिल्हारे की कानूनी स्थिति को लेकर फंसा हुआ है:
- 39 से 40 लाख रुपये के लेन-देन का दावा: पूर्व में बागसेवनिया थाने में रोहित की ओर से यह शिकायत सामने आई थी कि तृप्ति सिंह ने उसे मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPT) के होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने और अन्य युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 39.17 लाख रुपये की ठगी की है।
- एसपी ऑफिस के नाम से आए फर्जी कॉल: वहीं दूसरी ओर, नौकरी के नाम पर ठगी की शिकार हुई एक अन्य पीड़िता (ख्याति धौलपुरे) ने खुलासा किया कि उसे जॉइनिंग और पुलिस वेरिफिकेशन का भरोसा दिलाने के लिए जिस नंबर से फोन आया था, वह ट्रूकॉलर पर ‘एसपी ऑफिस भोपाल’ दिखाता था, लेकिन वह नंबर रोहित लिल्हारे के नाम पर दर्ज था।
- तृप्ति के मेमोरेंडम में नाम: पुलिस द्वारा जब्त तृप्ति के बयानों और डायरी में भी रोहित के संपर्क और पैसों के लेन-देन का स्पष्ट जिक्र है। पुलिस अब रोहित के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स को वेरिफाई कर रही है कि क्या वह युवाओं से पैसे लेकर तृप्ति को पहुंचाता था।
मुख्य आरोपी जेल में, नेटवर्क की पड़ताल जारी
बागसेवनिया और अन्य थानों में दर्ज मुकदमों के आधार पर मुख्य सरगना तृप्ति सिंह, उसका भाई सुधांशु और ड्राइवर फिलहाल जेल में हैं:
- पुलिस कमिश्नरेट की विशेष जांच टीम इस बात की तहकीकात कर रही है कि फर्जी आईएएस के इस रैकेट ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कितने बेरोजगार युवाओं और व्यापारियों को निशाना बनाया।
- टीआई के भाई रोहित लिल्हारे से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह तय करेगी कि क्या उसे मामले में गवाह बनाया जाए या फिर धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के सह-आरोपी के रूप में नामजद कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।
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