देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर स्थित प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Indore) वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। आईआईटी इंदौर एक वृहद अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन (Major Water Conference) की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस प्रतिष्ठित बहु-विषयक सम्मेलन में भारत सहित अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के 500 से अधिक प्रमुख वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, हाइड्रोलॉजिस्ट, नीति-निर्माता और जल प्रबंधन विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्रित होंगे।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change), तेजी से गिरते भूजल स्तर और शहरी जल संकट की पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय मंच जल सुरक्षा, शुद्धिकरण की नई तकनीकों और सतत जल प्रबंधन (Water Sustainability) की दिशा में ठोस रणनीतियां तय करेगा।
सम्मेलन के प्रमुख विमर्श और तकनीकी बिंदु आईआईटी इंदौर के पर्यावरण विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय संगोष्ठी में कई ज्वलंत मुद्दों पर तकनीकी शोध पत्र और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी:
- स्मार्ट वाटर ग्रिड और AI-IoT तकनीक: शहरों और कस्बों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट सेंसर सिस्टम के उपयोग पर व्यावहारिक मॉडल साझा किए जाएंगे।
- अपशिष्ट जल शोधन और शून्य तरल निर्वहन (ZLD): औद्योगिक और घरेलू सीवेज जल को 100% रिसाइकिल कर पुनः उपयोग योग्य बनाने की किफायती तकनीकों और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
- पारंपरिक जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण (Aquifer Recharge): भारतीय उपमहाद्वीप के पारंपरिक जल स्रोतों (बावड़ियों, तालाबों और कुओं) के पुनरुद्धार और भूजल के वैज्ञानिक संवर्धन के आधुनिक तौर-तरीकों पर केस स्टडीज प्रस्तुत की जाएंगी।
- क्लाइमेट-रेसिलिएंट नीतियां: सूखा और अतिवृष्टि जैसी चरम मौसमी घटनाओं के समय जल संसाधनों के संतुलित वितरण को लेकर नीति-निर्माताओं के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाएगा।
आईआईटी इंदौर की शोध पहल और लैब का प्रदर्शन सम्मेलन के दौरान आईआईटी इंदौर द्वारा जल शुद्धिकरण के क्षेत्र में विकसित स्वदेशी और कम लागत वाले फिल्टरेशन उपकरणों, नैनो-तकनीक और जल शोधन इकाइयों का सजीव प्रदर्शन भी किया जाएगा:
- ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के लिए समाधान: संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित वे समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे जो बिना बिजली के भारी धातुओं (जैसे आर्सेनिक, फ्लोराइड और लेड) को भूजल से अलग कर पीने योग्य पानी उपलब्ध कराते हैं।
- उद्योग और अकादमिक जगत का समन्वय: बहुराष्ट्रीय जल प्रौद्योगिकी कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ तकनीकी साझेदारी और नवाचारों के व्यावसायीकरण (Commercialization) पर विचार-विमर्श होगा।
इंदौर की ‘वॉटर प्लस’ छवि को मिलेगा वैश्विक मंच देश के पहले ‘वॉटर प्लस’ शहर इंदौर में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन मध्य प्रदेश के लिए भी अत्यंत गौरव का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के शीर्ष 500 जल विशेषज्ञों का यह बौद्धिक समागम न केवल मध्य प्रदेश और भारत के लिए, बल्कि समूचे विश्व के सामने खड़ी पेयजल और सिंचाई की चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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