मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में वर्षों तक डेडिकेटेड कॉरिडोर और आधुनिक स्टेशनों के साथ संचालित होने वाला बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) एक नए और विवादित दौर में प्रवेश कर चुका है। कॉरिडोर की रैलिंग और पुराने बस स्टेशनों को हटाए जाने के बाद बसों को सामान्य (मिक्स्ड) ट्रैफिक में संचालित किया जा रहा है। इस बदलाव के चलते दैनिक यात्रियों, विशेषकर छात्रों और कामकाजी वर्ग ने गंभीर समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा है। यात्रियों का आरोप है कि अब न केवल सफर में असामान्य देरी हो रही है, बल्कि ऑटोमेटेड टिकटिंग व्यवस्था बंद होने के बाद कंडक्टरों द्वारा बिना टिकट दिए किराया वसूलने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आ रही हैं।
यात्रियों का कहना है कि जिस बीआरटीएस को कभी समय बचाने, तेज गति और ट्रैफिक से मुक्ति के लिए जाना जाता था, वह अब पूरी तरह से साधारण खटारा लोकल सिटी बस सेवा में तब्दील होकर रह गया है।
मिक्स्ड ट्रैफिक का असर: 20 मिनट के सफर में लग रहा 45 मिनट कॉरिडोर के हटने से बसों की रफ्तार और विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ा है:
- ट्रैफिक जाम में फंसी बसें: पहले अलग लेन होने के कारण बसें बिना किसी रुकावट के तेज गति से चलती थीं। अब कारों, दोपहिया वाहनों और ऑटो के साथ एक ही लेन में चलने के कारण बसें प्रमुख चौराहों (जैसे भंवरकुआं, पलासिया, विजयनगर) पर घंटों जाम में फंस रही हैं।
- अनिश्चित समय-सारणी: यात्रियों के अनुसार, अब यह तय नहीं होता कि बस कब पहुंचेगी। गंतव्य तक पहुंचने का समय लगभग दोगुना हो चुका है, जिससे छात्रों की क्लास और नौकरीपेशा लोगों का दफ्तर समय पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
टिकटिंग में भारी गड़बड़ी: ‘पैसे ले रहे हैं, लेकिन टिकट नहीं दे रहे’ पुराने स्टेशनों पर स्वचालित टिकटिंग (Automated Smart Ticketing) खत्म कर बसों में कंडक्टर तैनात किए जाने के बाद भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं:
- बिना टिकट किराया वसूली: कई यात्रियों ने शिकायत की है कि बस कंडक्टर पैसे तो पूरे ले लेते हैं, लेकिन मांगने पर भी टिकट जारी नहीं करते।
- कम दूरी का टिकट: कुछ मामलों में लंबी दूरी का किराया वसूल कर यात्रियों को कम दूरी का टिकट थमा दिया जाता है, जिससे राजस्व का सीधा नुकसान नगर निगम व परिवहन उपक्रम को हो रहा है और यह पैसा सीधे जेबों में जा रहा है।
- छात्रों की परेशानी: छात्रों का कहना है कि जब वे टिकट मांगते हैं तो कंडक्टर आनाकानी करते हैं या बहस करने लगते हैं।
सड़क किनारे बने नए स्टॉप्स पर न शेड, न बैठने की जगह पुराने आधुनिक स्टेशनों के तोड़े जाने के बाद बनाए गए अस्थायी व सड़क किनारे के स्टॉप्स पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखा जा रहा है:
- धूप और बारिश में खड़े यात्री: नए बनाए गए स्टॉप्स पर न तो यात्रियों के बैठने के लिए बेंच हैं और न ही धूप या बारिश से बचने के लिए कोई शेड (Shelter) बनाया गया है।
- रूट मैप और डिजिटल डिस्प्ले गायब: स्टॉप्स पर किसी भी प्रकार की समय-सारणी, रूट मैप या बस आगमन की डिजिटल जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे नए यात्रियों को भारी भ्रम का सामना करना पड़ रहा है।
- कहीं भी रुक रही हैं बसें: यात्रियों का कहना है कि पहले निश्चित प्लेटफॉर्म पर ही बसें रुकती थीं, लेकिन अब बसें सड़क पर कहीं भी मनमाने ढंग से रोक दी जाती हैं, जिससे सड़क पर अन्य वाहनों के लिए भी दुर्घटना का जोखिम बढ़ रहा है।
यात्रियों ने नगर निगम प्रशासन और अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (AICTSL) से मांग की है कि कंडक्टरों की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जाए, ई-टिकटिंग मशीनों को अनिवार्य बनाया जाए और सड़क किनारे समुचित यात्री प्रतीक्षालय विकसित किए जाएं।
इंदौर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन व्यवस्था, जनसमस्याओं और हर निष्पक्ष व प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।












