मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की उल्टी गिनती शुरू होने के बीच प्रदेशवासियों और किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के अनुसार 19 सितंबर के बाद प्रदेश में एक और नया और मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने की प्रबल संभावना बन रही है। इस सिस्टम के असर से राज्य के कई हिस्सों में तेज से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे न केवल मानसून विदाई से पहले वातावरण में ठंडक घुलेगी, बल्कि प्रदेश के मौसमी बारिश के सामान्य कोटे की बची हुई कमी भी पूरी हो सकती है।
प्रदेश में 1 जून से अब तक औसतन 33 इंच (सामान्य कोटे का 88.5%) पानी गिर चुका है, जबकि औसत सामान्य आंकड़ा 37.3 इंच का है। राज्य को सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए महज 4.3 इंच अतिरिक्त बारिश की आवश्यकता है।
17 से 21 सितंबर के बीच ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, नए चक्रवाती परिसंचरण और लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से बारिश की गतिविधियां चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी:
- पश्चिमी मध्य प्रदेश में दायरा बढ़ेगा: 17 से 19 सितंबर के बीच मालवा-निमाड़ और पश्चिमी अंचल में मानसूनी बादल घने होंगे और कई स्थानों पर मध्यम से तेज वर्षा की संभावना है।
- पूर्वी मध्य प्रदेश में झमाझम: 18 से 21 सितंबर के दौरान विंध्य, महाकौशल और बुंदेलखंड के हिस्सों में हल्की से भारी वर्षा का दौर देखने को मिल सकता है।
- 19 सितंबर के बाद नया स्पेल: 19 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी से बनने वाला नया सिस्टम मध्य भारत की ओर रुख करेगा, जिससे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर और उज्जैन संभागों में तेज बारिश की गतिविधियां फिर जोर पकड़ेंगी।
प्रदेश के 18 जिलों में कोटा पूरा, 37 जिलों को अब भी दरकार आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मानसूनी सीजन में वर्षा का वितरण काफी असमान रहा है:
- कोटा पार करने वाले जिले: भोपाल, ग्वालियर, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया सहित 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। निवाड़ी में सामान्य से 49% अधिक वर्षा हुई है।
- कम बारिश वाले 37 जिले: इंदौर, उज्जैन और जबलपुर सहित 37 जिले अब भी सामान्य आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। अलीराजपुर में अब तक सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई है।
सितंबर अंत तक विदाई के संकेत आधिकारिक तौर पर मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। हालांकि पिछले वर्षों के रुझान को देखते हुए राजस्थान से मानसून की वापसी 19-20 सितंबर से शुरू होने के अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश से मानसून की पूरी विदाई सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक खिंच सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि 19 सितंबर के बाद संभावित यह बारिश देर से बोई गई खरीफ फसलों (सोयाबीन, धान) के दानों को भरने और आगामी रबी सीजन (गेहूं, चना) के लिए खेतों में नमी बनाए रखने में काफी फायदेमंद साबित होगी।
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