मध्य प्रदेश के आदिवासी और दूरस्थ अंचल सीधी जिले से ग्रामीण अधोसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी को उजागर करने वाली एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। पक्की सड़क के अभाव और बारिश के चलते कीचड़ में तब्दील हो चुके कच्चे रास्ते के कारण जब ‘108’ जननी/संजीवनी एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, तो बेबस ग्रामीणों को एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग को चारपाई (खाट) पर लिटाकर कई किलोमीटर तक पैदल ढोना पड़ा।
घुटनों तक गहरे कीचड़ और फिसलन भरे पथरीले रास्ते से होते हुए परिजनों ने जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग को मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से उन्हें वाहन के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
दलदल बने रास्ते में पहिए थमे, तो खाट ही बनी सहारा घटना के अनुसार, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के टोले में रहने वाले एक बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ने और सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजनों ने तत्काल आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को कॉल किया:
- रास्ते में फंसी एंबुलेंस: एंबुलेंस चालक मुख्य पक्की सड़क से गांव की ओर मुड़ा, लेकिन बारिश के कारण करीब 3 से 4 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग दलदल में तब्दील हो चुका था। वाहन के पहिए धंसने के खतरे को देखते हुए एंबुलेंस को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।
- समय पर इलाज का संकट: मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजनों और ग्रामीणों के पास इंतजार करने का समय नहीं था। उन्होंने बांस और चारपाई के सहारे एक मेकशिफ्ट ‘डोली’ तैयार की।
- 4 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर: गांव के चार युवकों ने खाट को अपने कंधों पर उठाया और फिसलते कदमों के साथ 4 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर एंबुलेंस तक पहुंचे।
सालों से पक्की सड़क की दरकार, वादे साबित हुए खोखले गांव के निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी ग्रामीण को स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान इस तरह की अमानवीय स्थिति से गुजरना पड़ा हो:
- बारिश में कट जाता है संपर्क: मानसून के महीनों में गांव का संपर्क पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट जाता है। स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह कच्चा मार्ग किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का इंतजार: ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जनपद पंचायत और जिला प्रशासन को आवेदन देकर सड़क निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही हाथ लगे।
प्रशासनिक संज्ञान और जांच की बात मामले की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं:
- अधिकारियों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में मनरेगा या ग्रामीण सड़क योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
- ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मार्ग के डामरीकरण या कंक्रीटीकरण का काम शुरू नहीं हुआ, तो पूरा गांव आगामी चुनावों में मतदान बहिष्कार का कदम उठाने को बाध्य होगा।
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