केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में लागू की जा रही ‘तीन-भाषा नीति’ (Three-Language Formula) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत से एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस नीति के क्रियान्वयन (Implementation) पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए केंद्र सरकार (मानव संसाधन विकास/शिक्षा मंत्रालय) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को औपचारिक नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत देते हुए आगामी 10 दिनों के भीतर अपना विस्तृत जवाब (Reply) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत सीबीएसई द्वारा स्कूलों में तीन भाषाओं को अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें दो भारतीय भाषाओं का होना जरूरी माना जा रहा है। इसी नीति के खिलाफ कुछ अभिभावक संघों और शिक्षाविदों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
- याचिकाकर्ताओं की दलील: याचिका में कहा गया है कि कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों पर अचानक तीन भाषाएं (जैसे—हिंदी, अंग्रेजी और एक स्थानीय/शास्त्रीय भाषा) थोपने से उन पर मानसिक दबाव बहुत बढ़ जाएगा। इसके अलावा, गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भाषाओं के चयन को लेकर विसंगतियां आ रही हैं, जिससे छात्रों के मुख्य विषयों (गणित, विज्ञान) की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
- तुरंत स्टे (Stays) की मांग: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि जब तक इस मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इस सत्र से लागू होने वाली इस नीति पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगा दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: “बिना सोचे-समझे नीतिगत फैसलों पर रोक नहीं लगा सकते”
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह शिक्षा क्षेत्र के नीतिगत फैसलों (Policy Decisions) में बिना पूरी पड़ताल के दखल नहीं देगी।
माननीय पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा: “हम शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई किसी नीति पर केवल आशंकाओं के आधार पर तुरंत रोक नहीं लगा सकते। हमें यह देखना होगा कि बोर्ड और सरकार का इस पर क्या तर्क है। बच्चों की शिक्षा का मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए हम केंद्र और NCERT का पक्ष जाने बिना कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।”
10 दिन का समय; अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और NCERT को जवाब दाखिल करने के लिए महज 10 दिनों का समय दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि केंद्र सरकार को अपने जवाब में यह स्पष्ट करना होगा कि:
- इस तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए देश भर के स्कूलों में बुनियादी ढांचा (जैसे संबंधित भाषाओं के योग्य शिक्षक) पर्याप्त मात्रा में मौजूद है या नहीं।
- क्या इस नीति के कारण छात्रों के ऊपर अतिरिक्त पाठ्यक्रम (Academic Burden) का बोझ नहीं बढ़ेगा?
अब देश भर के करोड़ों छात्रों, अभिभावकों और सीबीएसई स्कूलों की नजरें 10 दिनों बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिक गई हैं, जहां यह तय होगा कि नए सत्र में छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी या कोर्ट इस पर कोई नया दिशा-निर्देश जारी करेगा।












