देश के युवाओं के बीच बेरोजगारी और नीतिगत मुद्दों पर व्यंग्य (सैटायर) के जरिए हलचल मचाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर करोड़ों युवाओं को प्रभावित करने वाले इस डिजिटल मूवमेंट की फंडिंग और इसके पीछे के वास्तविक उद्देश्यों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में ‘विदेशी फंडिंग’ और ‘टूलकिट’ का आरोप सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई सामान्य यूथ मीम-पेज नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने के लिए इस अभियान को विदेशों से फंडिंग मिल रही है। याचिका में इस पूरे इकोसिस्टम की गहराई से जांच के लिए सीबीआई (CBI) या एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है, ताकि इसके पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
फाउंडर अभिजीत दिपके का बयान– ‘इंस्टाग्राम वापस मिला’ इस कानूनी घमासान और एक्स (X) अकाउंट ब्लॉक होने के बीच, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सोशल मीडिया वॉलिंटियर अभिजीत दिपके ने एक बड़ा अपडेट साझा किया है। दिपके ने बताया कि पिछले दिनों कुछ तकनीकी बाधाओं और प्रतिबंधों के बाद आखिरकार उन्हें अपने मुख्य इंस्टाग्राम अकाउंट का कंट्रोल वापस मिल गया है। उन्होंने कहा कि उनका यह सैटायर पेज किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं की वास्तविक आवाज है, जिसे दबाने के लिए कानूनी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
















