देश की राजधानी के प्रशासनिक गलियारों और केंद्रीय मंत्रालयों से एक बेहद दुर्लभ और सनसनीखेज खबर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ (Personal Staff) में एक साथ इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है कि पूरी दिल्ली की ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) में हड़कंप मच गया है। सरकार द्वारा जारी ताबड़तोड़ आदेशों के तहत मंत्री के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले निजी सचिव (PS) अमर सिंह को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। सिर्फ यही नहीं, उनके साथ काम कर रहे दो अन्य बेहद वरिष्ठ अतिरिक्त निजी सचिवों (APS) की सेवाएं भी अचानक समाप्त कर उन्हें कार्यमुक्त (Relieve) कर दिया गया है।
‘प्रशासनिक आधार’ पर रोकी गई विदाई; मूल कैडर में लौटने के आदेश
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई है:
- निजी सचिव अमर सिंह की छुट्टी: वर्ष 2010 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS – Income Tax) अधिकारी अमर सिंह लंबे समय (2021 से) से भूपेंद्र यादव की कोर टीम का हिस्सा रहे थे (जब वे श्रम मंत्री थे)। आदेश के मुताबिक, उन्हें ‘प्रशासनिक आधार’ पर उनके मूल कैडर यानी राजस्व विभाग (Department of Revenue) में वापस भेज दिया गया है। डीओपीटी (DoPT) के नियमों के तहत उनका कार्यकाल सितंबर 2026 तक था, जिसे समय से पहले ही अचानक खत्म कर दिया गया है।
- अतिरिक्त निजी सचिवों की सेवाएं समाप्त: अमर सिंह के साथ ही एडिशनल पीएस शैलेश कुमार सिंह (केंद्रीय सचिवालय सेवा – CSS) को “समय से पहले वापस” भेजते हुए उनके मूल विभाग DoPT में ‘एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ’ के प्रावधान के तहत रिलीव कर दिया गया है। वहीं, एक अन्य एडिशनल पीएस आयुष शरण (और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव) की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह ‘टर्मिनेट’ (समाप्त) कर दिया गया है।
क्यों हुई इतनी बड़ी सामूहिक कार्रवाई? वजहों पर सस्पेंस
केंद्र सरकार या मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन चारों अलग-अलग आदेशों (जिन पर अवर सचिव विभूति पंजियार के हस्ताक्षर हैं) में इस ‘महा-सफाई’ की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। किसी केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ के शीर्ष तीन-चार अधिकारियों को एक ही दिन और एक साथ इस तरह अचानक हटाए जाने की घटना को प्रशासनिक हलकों में बेहद असामान्य माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि किसी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले या विभागीय फाइलों के निस्तारण में आई किसी बड़ी विसंगति के चलते शीर्ष स्तर से मिली हरी झंडी के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
विपक्ष ने लपका मुद्दा; उठाए गंभीर सवाल
इस बड़ी प्रशासनिक हलचल के बाद राजनीति भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस अचानक हुई कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इस ‘ओपेक पर्ज’ (पारदर्शिता की कमी) पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक फंडिंग और हालिया विवादों से जोड़ना शुरू कर दिया है और पूछा है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि पूरी टीम को आधी रात को कार्यमुक्त करना पड़ा?
मंत्रालय में फिलहाल नए निजी सचिव की तैनाती को लेकर माथापच्ची चल रही है और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच लंबित फाइलों की समीक्षा की जा रही है।












