धर्मनगरी उज्जैन में पवित्र श्रावण मास के द्वितीय सोमवार को देवाधिदेव महादेव भगवान श्री महाकालेश्वर जी की द्वितीय भव्य सवारी पूरे विधि-विधान, राजसी ठाठ-बाठ और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। अवंतिकानाथ भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले, तो पूरी उज्जैन नगरी ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी।
द्वितीय सोमवार की सवारी में भगवान महाकाल ने अपने ‘चंद्रमौलेश्वर’ रूप में रजत पालकी में विराजित होकर भक्तों को दर्शन दिए, जबकि हाथी पर मनमहेश रूप में भगवान विराजित रहे।
मंदिर परिसर में पूजन एवं गार्ड ऑफ ऑनर (Royal Protocol)
- सभामंडप में विशेष पूजन: सवारी निकलने से पूर्व दोपहर 4:00 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन और आरती की गई।
- सशस्त्र पुलिस बल द्वारा सलामी: पूजन के उपरांत जैसे ही भगवान महाकाल की पालकी मुख्य द्वार पर पहुँची, वहाँ मौजूद पुलिस बैंड और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान अवंतिकानाथ को सलामी (Guard of Honour) दी गई।
शिप्रा तट रामघाट पर हुआ मोक्षदायिनी जल से अभिषेक
- पारंपरिक मार्ग से भ्रमण: मुख्य द्वार से निकलकर पालकी गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होती हुई पवित्र मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पहुँची।
- शिप्रा जल से जलाभिषेक: रामघाट पर पुराहितों और आचार्यों द्वारा माँ शिप्रा के पवित्र जल से भगवान चंद्रमौलेश्वर का अभिषेक व पूजन-अर्चन किया गया।
- पुष्पवर्षा और आरती: घाट पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं और साधु-संतों की मौजूदगी में भव्य आरती उतारी गई। इसके बाद सवारी अपने निर्धारित मार्गों—रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, जगन्नाथ मंदिर और ढाबा रोड होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंची।
श्रद्धालुओं का जनसैलाब और कड़े सुरक्षा इंतजाम
- फूलों और रंगोली से सजा मार्ग: सवारी मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर और आकर्षक रंगोलियां बनाकर बाबा महाकाल का स्वागत किया।
- प्रशासनिक व्यवस्थाएं: लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए उज्जैन पुलिस व प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरी सवारी मार्ग की सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई।












