मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म (Nomination Paper) निरस्त किए जाने का मामला अब कानूनी रूप से गर्मा गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर चुनाव याचिका (Election Petition) पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए तीन नवनिर्वाचित भाजपा राज्यसभा सांसदों—तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवट सहित भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाई कोर्ट के जस्टिस बी. पी. शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी उत्तरदाताओं (Respondents) को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
⚖️ क्या है पूरा मामला और नटराजन की दलील? (Case Background)
- जून 2026 में निरस्त हुआ था नामांकन: जून 2026 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा की 3 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव में कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर (विधानसभा प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा) ने खारिज कर दिया था।
- आपराधिक मामला छिपाने का आरोप: भाजपा उम्मीदवारों महेश केवट और राहुल कोठारी की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन रद्द किया था कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Form-26) में तेलंगाना/हैदराबाद में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है।
- याचिका में नटराजन का पक्ष: मीनाक्षी नटराजन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि उनके खिलाफ किसी भी पुलिस स्टेशन में कोई एफआईआर या आपराधिक केस विचाराधीन नहीं है। तेलंगाना में केवल एक निजी शिकायत (Private Complaint) में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया गया था। बिना किसी अपराध के आरोपी बने केवल प्राइवेट नोटिस के आधार पर नियमों को ताक पर रखकर जल्दबाजी में उनका नामांकन रद्द किया गया, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है।
📌 सुप्रीम कोर्ट ने दिया था चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करने का निर्देश
इससे पूर्व, जून 2026 में ही मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर नामांकन रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329(बी) का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करना ही एकमात्र कानूनी विकल्प है। उसी निर्देश के तहत नटराजन ने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
🏛️ किन-किन पक्षों को जारी हुआ है नोटिस? (Respondents List)
हाई कोर्ट ने इस याचिका में निम्नलिखित सभी प्रमुख पक्षों को नोटिस जारी किया है:
- तरुण चुघ (बीजेपी से निर्विरोध निर्वाचित राज्यसभा सांसद)
- रजनीश कुमार अग्रवाल (बीजेपी से निर्विरोध निर्वाचित राज्यसभा सांसद)
- महेश केवट (बीजेपी से निर्विरोध निर्वाचित राज्यसभा सांसद)
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC), भारत निर्वाचन आयोग
- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग
- प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश विधानसभा (बतौर रिटर्निंग ऑफिसर)
आगे क्या?
भाजपा के तीनों प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन के बाद यदि हाई कोर्ट इस चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को अमान्य ठहराता है, तो मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव परिणामों पर इसका बड़ा विधिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।












