राजधानी भोपाल, इंदौर और प्रदेश के प्रमुख शहरों के आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध दुकानों, दफ्तरों, गोडाउन, कोचिंग सेंटरों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर अब ताला लगने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कड़े रुख और हालिया आदेशों के बाद राज्य शासन और नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है।
निगम प्रशासन ने शहर के मास्टर प्लान के विपरीत रिहायशी भूखंडों पर संचालित अवैध व्यवसायों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सीलिंग, नोटिस और ट्रेड लाइसेंस रद्द करने की एक व्यापक नई कार्ययोजना (Action Plan) बनाना शुरू कर दिया है।
क्या है पूरा मामला? (Background of the Case)
- आवासीय क्षेत्रों का व्यावसायिक उपयोग: देश भर के साथ-साथ मध्य प्रदेश के बड़े शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर) के मास्टर प्लान में जो क्षेत्र केवल रहने (Residential) के लिए आरक्षित हैं, वहाँ बिना अनुमति बड़ी-बड़ी दुकानें, रेस्टोरेंट, क्लीनिक, गोदाम और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खोल लिए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट की राष्ट्रव्यापी जांच का आदेश: जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को कानून व जनहित के खिलाफ माना। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि नगर निगम अधिकारियों की ढिलाई या सांठगांठ के कारण पूरी इमारत बनने के बाद कार्रवाई की जाती है।
- हाई कोर्ट व सरकारी राहत खत्म: भोपाल के कई आवासीय क्षेत्रों (जैसे अरेरा कॉलोनी, एमपी नगर से सटे आवासीय ब्लॉक) में बनी अवैध दुकानों को राज्य सरकार की समितियों या हाई कोर्ट के स्थगन (Stay) से मिल रही अस्थाई राहत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और निगम को स्थिति सुधारने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
निगम प्रशासन की नई कार्ययोजना के 5 प्रमुख बिंदु
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए नगर निगम और नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) विभाग मिलकर निम्नलिखित कदम उठा रहे हैं:
- 1. वार्डवार सर्वे और मैपिंग (Comprehensive Survey):
- निगम की राजस्व और अतिक्रमण निरोधक टीमें हर वार्ड में जाकर जीआईएस (GIS) मैपिंग और सर्वे के जरिए उन संपत्तियों की सूची तैयार कर रही हैं, जिन्हें रिहायशी अनुमति पर व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
- 2. नोटिस और सीलिंग की चेतावनी (Notices & Sealing Drive):
- मास्टर प्लान 2031 के ‘मिक्स यूज़’ (Mixed Use Policy) नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को 7 से 15 दिनों का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
- संतोषजनक जवाब न मिलने पर सीधे संपत्ति को सील (Seal) करने और बिजली-पानी के कमर्शियल कनेक्शन काटने की कार्रवाई होगी।
- 3. ट्रेड लाइसेंस और अनुमति रद्द (No Trade License):
- बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट या आवासीय अनुमति वाली संपत्तियों पर चल रहे किसी भी व्यवसाय का ट्रेड लाइसेंस रिन्यू या जारी नहीं किया जाएगा।
- 4. नो-कंस्ट्रक्शन व ग्रीन ज़ोन पर विशेष नजर:
- पार्कों, तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र और 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों वाले आवासीय मोहल्लों में चलने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर बंद कराया जाएगा।
- 5. जवाबदेही और शपथ पत्र (Affidavit in SC):
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार नगर निगम आयुक्त को खुद कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह बताना होगा कि शहर के कितने रिहायशी इलाकों को अवैध व्यापार से मुक्त कराया गया है।
आम नागरिकों और व्यापारियों पर क्या होगा असर?
- रहवासियों को राहत: रिहायशी इलाकों में अवैध दुकानों और कोचिंग सेंटरों के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम, अनधिकृत पार्किंग, शोर-शराबे और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
- व्यापारियों की चिंता: दूसरी ओर, रिहायशी मकानों के भूतल (Ground Floor) पर छोटे-मोटे व्यवसाय चलाकर जीवन यापन करने वाले मध्यमवर्गीय व्यापारियों में हड़कंप है। व्यापारिक संगठनों ने मांग की है कि छोटे दुकानदारों को नियमित करने (Regularization) या वैकल्पिक व्यावसायिक स्थान देने का प्रावधान किया जाए।












