आधुनिकता की अंधी दौड़ और भौतिक सुख-सुविधाओं को जुटाने के चक्कर में आज का इंसान केवल धन-दौलत और बैंक बैलेंस बढ़ाने में मग्न है। हर माता-पिता अपनी आने वाली पीढ़ी (बच्चों) के सुरक्षित भविष्य के लिए जमीन, मकान और मोटी रकम जोड़ने को ही अपना अंतिम लक्ष्य मान चुके हैं। लेकिन इस बीच हम यह भूल रहे हैं कि यदि हमारी आने वाली पीढ़ी को विरासत में प्रदूषित हवा, जहरीला पानी, भयंकर गर्मी और बंजर धरती मिलेगी, तो करोड़ों का यह बैंक बैलेंस उनके किसी काम नहीं आएगा। आज समय की मांग है कि हम धन के साथ-साथ उनके लिए एक समृद्ध पर्यावरण भी छोड़कर जाएं।
पर्यावरण संरक्षण के बिना हर विकास अधूरा हाल के वर्षों में जिस तरह से मौसम का मिजाज बदला है, भीषण गर्मी और जल संकट का ग्राफ बढ़ा है, उसने इंसानी वजूद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में पर्यावरण संतुलन और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को अपनाना अब केवल एक चॉइस नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने काफिले में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) शामिल करने और वनों व वन्यजीवों के संरक्षण जैसे कदम इसी दिशा में एक बड़ा संदेश हैं। कोई भी विकास तब तक टिकाऊ नहीं हो सकता, जब तक उसमें प्रकृति का संरक्षण शामिल न हो।
आज की छोटी सी आदत, कल देगी नया जीवन हमें समझना होगा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, सिंगल-यूज प्लास्टिक का त्याग करना, पानी की बर्बादी रोकना और अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधे लगाना ही असली निवेश है। आने वाली पीढ़ी को हमें वित्तीय साक्षरता के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। यदि हम आज सचेत नहीं हुए, तो भविष्य में हमारी संतानें महँगी गाड़ियाँ तो खरीद लेंगी, लेकिन शुद्ध ऑक्सीजन खरीदने के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। आइए संकल्प लें कि हम अपने बच्चों के लिए एक ऐसी हरी-भरी और सुरक्षित धरती छोड़ेंगे, जहाँ वे खुलकर सांस ले सकें।

















