कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के हालिया बयान को लेकर कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद विपक्षी दलों को कांग्रेस पर हमला करने का नया मौका मिल गया है। अब इस बहस में जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा भी कूद पड़े हैं और उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
सूत्रों के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा के बयान के बाद कांग्रेस में यह चर्चा तेज है कि पार्टी को इस तरह के बयानों से दूरी बनानी चाहिए या खुलकर बचाव करना चाहिए। प्रियंका गांधी के बयान को जहां एक वर्ग संतुलित और सधे हुए जवाब के रूप में देख रहा है, वहीं राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को पार्टी की आधिकारिक लाइन से जोड़कर देखा जा रहा है। इन दोनों रुखों के बीच अंतर ने यह संकेत दिया है कि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एकमत नहीं है।
उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को पहले यह तय करना चाहिए कि वह किन मुद्दों पर और किस तरह की राजनीति करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में स्पष्ट नेतृत्व की कमी है और इसी वजह से बार-बार इस तरह के विरोधाभासी बयान सामने आते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब कांग्रेस पहले से ही कई राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में अंदरूनी मतभेद विपक्ष को मजबूत करने का अवसर दे सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर स्पष्ट और एकजुट रुख अपनाती है या यह बहस और गहराती है।















