मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अब केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। ‘राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’ के सहयोग से वे आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में एक साधारण सा सरकारी तालाब अब महिलाओं की तरक्की और लाखों की आमदनी का मुख्य आधार बन गया है।
मछली पालन से बदली किस्मत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने मिलकर ‘स्वयं सहायता समूह’ (SHG) का गठन कर नई शुरुआत की है। आर्थिक तंगी का सामना कर रही इन महिलाओं ने ग्राम पंचायत से गांव के बड़े तालाबों को लीज पर लेने का साहसिक फैसला किया। पंचायत और आजीविका मिशन के अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इन तालाबों में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन और सिंघाड़े की खेती शुरू की।
लाखों में पहुंच रही है सालाना कमाई
- बंपर उत्पादन: शुरुआत में थोड़ा जोखिम था, लेकिन पहली ही खेप में बंपर मछली उत्पादन ने महिलाओं का हौसला कई गुना बढ़ा दिया।
- आर्थिक मजबूती: अब ये समूह हर साल स्थानीय बाजारों में मछलियां और सिंघाड़ा बेचकर 3 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
- जीवन स्तर में सुधार: जो महिलाएं कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं, वे आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं। इस आमदनी से वे न केवल अपने परिवार का बेहतर भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं।
प्रशासन का मिल रहा पूरा सहयोग स्थानीय प्रशासन ने महिलाओं को मछली के उन्नत बीज, जाल और उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है। इन महिलाओं की इस शानदार सफलता ने आसपास के दर्जनों गांवों के लिए एक नई प्रेरणा और सशक्तिकरण का मॉडल पेश किया है।











