नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त कदम उठाया है। NHRC ने मीडिया रिपोर्टों और वीडियो साक्ष्यों का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त (Delhi Police Commissioner) को नोटिस जारी किया है और 2 सप्ताह (14 दिन) के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और संसद में उठ रहे सवालों के बीच मानवाधिकार आयोग के इस कदम से दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय पर प्रशासनिक दबाव और बढ़ गया है।
NHRC द्वारा नोटिस में उठाई गई 3 प्रमुख बातें:
- मानवाधिकारों का उल्लंघन: आयोग ने टिप्पणी की कि यदि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह प्रदर्शनकारी छात्रों के मानवाधिकारों और उनके शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के संवैधानिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
- बल प्रयोग की आनुपातिकता (Proportionality of Force): पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा गया है कि शांतिपूर्ण और निहत्थे छात्रों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग करने की क्या आवश्यकता थी।
- घायलों के इलाज और दर्ज मुकदमों का ब्योरा: NHRC ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि झड़प और लाठीचार्ज के दौरान घायल हुए छात्रों की चिकित्सा स्थिति क्या है और हिरासत में लिए गए या जेल भेजे गए युवाओं पर किन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई हैं।
2 सप्ताह के भीतर सौंपनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
NHRC ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली पुलिस आयुक्त को 14 दिनों के भीतर घटनाक्रम की बिंदुवार जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट में घटनास्थल पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका और छात्रों पर दर्ज प्राथमिकियों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।
जंतर-मंतर पर आंदोलित छात्रों को मिला बड़ा नैतिक समर्थन
सुप्रीम कोर्ट के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से जंतर-मंतर पर डटे छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों को बड़ा नैतिक समर्थन मिला है। छात्र संगठनों का कहना है कि आयोग के इस कड़े रुख से पुलिस द्वारा की गई ज्यादतियों की पोल खुलेगी और निर्दोष छात्रों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लेने का रास्ता साफ होगा।












