सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम की प्रोविजनल/फाइनल आंसर-की के 6 सवालों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित परिणाम और ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद NTA की मौजूदा रिजल्ट सूची और जारी काउंसलिंग प्रक्रिया पर लगा संशय पूरी तरह खत्म हो गया है।
मामले के मुख्य बिंदु और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
- 6 सवालों के जवाबों पर था विवाद: केरल की अभ्यर्थी गायत्री अरुण द्वारा दायर याचिका (Article 32) में केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी के 6 प्रश्नों के आधिकारिक उत्तरों पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा था कि ये उत्तर NCERT की पाठ्यपुस्तकों से मेल नहीं खाते हैं और एक-एक प्रश्न से रैंक में बड़ा अंतर आ सकता है।
- अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालतें विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) की जगह नहीं ले सकतीं और उत्तर पुस्तिकाओं/आंसर-की की शुद्धता का मूल्यांकन करना न्यायपालिका का काम नहीं है।
- परिणाम रोकने/रैंक बदलने की मांग खारिज: याचिकाकर्ता ने काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने और अपनी रैंक संशोधित करने की मांग की थी, जिसे पीठ ने बिना कोई आधार पाए खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट से भी खारिज हो चुकी थी याचिका
इससे पहले याचिकाकर्ता ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां सिंगल बेंच (जस्टिस बीचू कुरियन थॉमस) और बाद में डिवीजन बेंच ने भी यही कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि उत्तर कुंजियों में अदालती हस्तक्षेप से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य और काउंसलिंग प्रक्रिया प्रभावित होगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले के साथ ही 21 जून को आयोजित हुए NEET UG 2026 री-एग्जाम के परिणाम और NTA की मेरिट लिस्ट पूरी तरह से वैध और बरकरार रहेगी।












