मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की लेती-देती व अनुपस्थिति पर लगाम लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग द्वारा जारी नए और बेहद सख्त आदेश के मुताबिक, जो शिक्षक मोबाइल ऐप के जरिए अपनी डिजिटल ई-अटेंडेंस (e-Attendance) दर्ज नहीं कर रहे हैं, यदि किसी भी संकुल प्राचार्य (Principal) ने उनका वेतन (Salary) आहरण करने का प्रस्ताव कोषालय (Treasury) को भेजा, तो संबंधित प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा। सरकार के इस आदेश से प्रदेश भर के शिक्षा महकमे और शिक्षक संगठनों में हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही पर आयुक्त का सीधा प्रहार दरअसल, शासन के बार-बार निर्देश देने के बावजूद कई जिलों में शिक्षक ऑनलाइन ई-अटेंडेंस लगाने में लापरवाही बरत रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना अटेंडेंस के भी संकुल प्राचार्यों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर इन शिक्षकों का मासिक वेतन बिल पास कर दिया जाता था। स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए साफ किया है कि “नो वर्क, नो पे” (No Work, No Pay) के सिद्धांत का कड़ाई से पालन होना चाहिए। डिजिटल रिकॉर्ड में जो शिक्षक अनुपस्थित या बिना ई-अटेंडेंस के पाया जाएगा, उसका उस दिन का वेतन कटना अनिवार्य है।
प्राचार्यों की जवाबदेही तय; हर महीने की 5 तारीख तक देनी होगी रिपोर्ट नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राचार्यों को अब वेतन आहरण प्रस्ताव (Salary Withdrawal Proposal) भेजने से पहले एम-शिक्षामित्र (M-Shikshamitra) या संबंधित विभागीय पोर्टल के अटेंडेंस डेटा का बारीकी से मिलान करना होगा।
- दोषी प्राचार्यों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई: यदि ऑडिट या निरीक्षण में किसी भी ऐसे शिक्षक का वेतन जारी होना पाया गया जिसने ई-अटेंडेंस नहीं लगाई थी, तो इसे वित्तीय अनियमितता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। इसके लिए सीधे संकुल प्राचार्य को जिम्मेदार मानते हुए विभागीय जांच के साथ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
- सख्त मॉनिटरिंग: जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को भी निर्देशित किया गया है कि वे हर ब्लॉक के प्राचार्यों की रिपोर्ट की क्रॉस-वेरिफिकेशन करें, ताकि कोई भी लापरवाह कर्मचारी शासकीय राशि का अनुचित लाभ न ले सके।












