नीट-यूजी (NEET-UG) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में देश भर में मचे बवाल और छात्र आंदोलनों के बीच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court of Madhya Pradesh) ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एमपी हाईकोर्ट ने राज्य में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली से जुड़े सभी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Courts) गठित करने के आदेश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट के इस कड़े निर्देश के अनुसार, ये फास्ट ट्रैक अदालतें पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं से संबंधित सभी विचाराधीन व नए दर्ज मामलों की सुनवाई कर 3 महीने (90 दिन) की समय-सीमा के भीतर अंतिम फैसला (Disposal) सुनाएंगी।
हाईकोर्ट के आदेश की 3 प्रमुख बातें:
- विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन: भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में एक-एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा जो केवल पेपर लीक व परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी।
- 3 महीने की सख्त डेडलाइन: किसी भी स्थिति में केस की सुनवाई को लटकाया नहीं जाएगा। जांच एजेंसियों को त्वरित चालान पेश करने और अदालतों को 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाने के निर्देश दिए गए हैं।
- दोषियों को कड़ी सजा का संदेश: हाईकोर्ट के इस सख्त रुख का उद्देश्य प्रदेश के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के मन में न्याय का विश्वास बहाल करना और पेपर लीक माफियाओं के मन में कड़ा खौफ पैदा करना है।
लाखों छात्रों और युवाओं के लिए बड़ी राहत
जंतर-मंतर पर जमे छात्रों (CJP) के आंदोलन और संसद में उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रदेश के लाखों युवाओं के हित में बड़ा फैसला माना जा रहा है। अब तक सालों-साल अदालती मुकदमों में उलझे रहने वाले पेपर लीक मामलों का अब महज 90 दिनों में निस्तारण हो सकेगा, जिससे दोषियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जा सकेगा।












