परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों व युवाओं द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी आंदोलन के बीच बीबीसी न्यूज हिंदी (BBC News Hindi) की एक विशेष रिपोर्ट ने देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिपोर्ट में सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के जजों की टिप्पणियों, बेल (जमानत) के कड़े नियमों और आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग के संदर्भ में नागरिक अधिकारों पर गहराते संकट को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले युवाओं और छात्रों को किस तरह गंभीर कानूनी धाराओं में फंसाकर जेलों में भेजा जा रहा है, जहां उन्हें जमानत मिलने में भी हफ्तों और महीनों की कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
जमानत कानून और छात्रों की न्यायिक स्थिति पर उठे सवाल
- ‘Bail is Rule, Jail is Exception’ की अनदेखी: देश के शीर्ष कानूनविद और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह तय सिद्धांत रहा है कि “जमानत एक नियम है और जेल एक अपवाद”। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं को मामलों में तुरंत जमानत नहीं मिल पा रही है।
- पुलिस की कड़ाई और केस दर्ज करने का तरीका: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान झड़प और बैरिकेडिंग की घटनाओं के बाद पुलिस द्वारा छात्रों पर दर्ज गैर-जमानती धाराओं (Non-Bailable Sections) को लेकर कानूनी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
- सुनवाई में देरी से भविष्य पर असर: अदालतों में लंबित मामलों और वीडियो साक्ष्यों की जांच के नाम पर होने वाली देरी से हजारों युवाओं की पढ़ाई, करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
CJP और विपक्ष ने केंद्र सरकार व पुलिस प्रशासन को घेरा
बीबीसी न्यूज हिंदी की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर डटे छात्र आंदोलनकारियों और विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर दमनकारी रुख अपनाने का आरोप लगाया है। छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन को दबाने के लिए छात्रों को डराया जा रहा है, लेकिन अहिंसात्मक सत्याग्रह जारी रहेगा।












