मध्य प्रदेश में विकास कार्यों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं को निर्बाध गति से चलाने के लिए राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर कर्ज का सहारा लिया है। वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने खुले बाजार (Open Market) से 3,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाया है। इस नई उधारी के साथ ही राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 की स्थिति में प्रदेश पर कुल 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज था।
दो किश्तों में लिया गया ऋण; 2056 तक चुकानी होगी उधारी
वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह 3,600 करोड़ रुपये की राशि ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (Securities) की नीलामी के माध्यम से जुटाई गई है। यह कर्ज दो अलग-अलग किश्तों और अवधियों के लिए लिया गया है:
- पहली किश्त: 1,600 करोड़ रुपये का कर्ज 18 वर्ष की समयावधि के लिए लिया गया है।
- दूसरी किश्त: 2,000 करोड़ रुपये का बड़ा कर्ज 30 वर्ष की लंबी अवधि के लिए लिया गया है, जिसकी परिपक्वता अवधि (Maturity) वर्ष 2056 तक रहेगी।
- ब्याज का भुगतान: इन दोनों ही ऋणों पर राज्य सरकार को 7.90 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज चुकाना होगा। ब्याज का भुगतान हर साल 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा।
प्रदेश पर कुल देनदारी पहुंची 5.61 लाख करोड़ के पार!
लगातार लिए जा रहे कर्ज के कारण प्रदेश का वित्तीय ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार, 31 मार्च तक मध्य प्रदेश पर जो 4,88,714.17 करोड़ रुपये का कर्ज था, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा (3,33,278 करोड़ रुपये) केवल मार्केट लोन (बाजारू उधारी) का ही था।
इस नए कर्ज के जुड़ने के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपये हो गया है। अगर इसमें केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि, वित्तीय संस्थानों और अन्य स्रोतों की कुल देनदारियों को भी मिला लिया जाए, तो मध्य प्रदेश पर अब कुल देनदारी बढ़कर लगभग 5.6114 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है।












