माध्यमिक शिक्षा मण्डल और प्रशासनिक गलियारों में हलचल के बीच मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। मोहन यादव सरकार आज 5,200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से तीन अलग-अलग चरणों में लिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, विकास कार्यों की गति बनाए रखने और लाड़ली बहना जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए यह कदम उठाया गया है।
कर्ज का गणित: तीन चरणों का विवरण
सरकार आज जो कर्ज ले रही है, उसे अलग-अलग समयावधि (Tenure) के लिए लिया जा रहा है ताकि पुनर्भुगतान का बोझ एक साथ न आए:
| चरण (Tranche) | राशि (Amount) | अवधि (Duration) |
| पहला चरण | ₹2,000 करोड़ | 10 वर्ष के लिए |
| दूसरा चरण | ₹2,000 करोड़ | 15 वर्ष के लिए |
| तीसरा चरण | ₹1,200 करोड़ | 20 वर्ष के लिए |
प्रदेश पर कर्ज का कुल बोझ (Debt Situation)
मध्य प्रदेश पर कर्ज का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:
- कुल अनुमानित कर्ज: लगभग ₹4.25 लाख करोड़।
- प्रति व्यक्ति कर्ज: प्रदेश के हर नागरिक पर अब औसतन ₹50,000 से अधिक का कर्ज बोझ है।
- बजट का हिस्सा: राज्य के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज (Interest) चुकाने में चला जाता है।
विपक्ष इस बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं सरकार का अपना तर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज लेना मजबूरी और रणनीति दोनों है:
- विकास परियोजनाएं (Infrastructure): राज्य में चल रहे नेशनल हाईवे, मेट्रो प्रोजेक्ट और सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़े पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की आवश्यकता है।
- जनकल्याणकारी योजनाएं: ‘लाड़ली बहना योजना’, ‘किसान कल्याण योजना’ और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं के लिए हर महीने हजारों करोड़ रुपये की नकदी की जरूरत होती है।
- राजस्व में कमी: जीएसटी (GST) संग्रह और राज्य के स्वयं के कर राजस्व में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी न होना भी एक कारण है।
- अनुपूरक बजट की तैयारी: आगामी बजट सत्र से पहले विभागों की लंबित देनदारियों को चुकाने के लिए यह ऋण लिया जा रहा है।
















