मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाल खेल व्यवस्था और खेल शिक्षकों (Sports Teachers) की भारी कमी को लेकर राजनैतिक पारा गरमा गया है। कांग्रेस ने प्रदेश के खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल दागे हैं। विपक्ष ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार एक तरफ तो ‘खेलो इंडिया’ और ओलंपिक पदकों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ राज्य के लाखों बच्चों को खेल शिक्षा की बुनियादी सुविधा तक मयस्सर नहीं है।
1.22 लाख स्कूलों में से 1.21 लाख बिना स्पोर्ट्स टीचर के: कांग्रेस विपक्ष द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुल 1.22 लाख स्कूल हैं, लेकिन बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 1.21 लाख स्कूलों में खेल शिक्षक ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, खुद राजधानी भोपाल की स्थिति और भी बदतर है, जहां के 991 सरकारी स्कूलों में महज 5 खेल शिक्षक पदस्थ हैं। कांग्रेस ने खेल मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “विश्वास सारंग जी लगातार खेलों में मिलने वाली उपलब्धियों का श्रेय लेने में व्यस्त हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब बच्चों को खेल सिखाने वाला ही कोई नहीं होगा, तो खेल प्रतिभाएं कैसे आगे बढ़ेंगी?”
प्रचार में तस्वीरें, जमीन पर व्यवस्था गायब; खेल मंत्री से पूछे 3 सवाल कांग्रेस ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं और खेल प्रतिभाओं के भविष्य के साथ सरासर अन्याय बताया है। विपक्ष ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के जरिए खेल मंत्री से तीन सीधे सवाल पूछे हैं:
- 1.21 लाख स्कूल आखिर बिना स्पोर्ट्स टीचर के क्यों चल रहे हैं?
- इन विभागों में वर्षों से रिक्त पड़े पदों पर अब तक भर्ती क्यों नहीं की गई?
- मध्य प्रदेश के नौनिहालों और बच्चों का खेल भविष्य आखिर किसके भरोसे छोड़ दिया गया है?
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार प्रचार और विज्ञापनों में तो खिलाड़ियों की तस्वीरें चमकाती है, लेकिन जमीन पर नए खिलाड़ी तैयार करने का पूरा ढांचा ही गायब है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बच्चों को अब खोखली घोषणाएं नहीं, बल्कि मैदान पर खेल शिक्षक चाहिए।

















