मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे और मंत्रालय (वल्लभ भवन) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) में सबसे उच्च प्राथमिकता वाले ‘CM A+ श्रेणी’ (CM A+ Cases) के मामलों की समीक्षा के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। शासन की मंशानुसार जिन फाइलों और नोटशीटों पर तत्काल निर्णय लिया जाना था, वैसी 821 अत्यंत महत्वपूर्ण नोटशीट लंबे समय से विभिन्न विभागों और टेबल-दर-टेबल इधर-उधर घूम रही थीं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। इस घोर लापरवाही पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के तीखे तेवर देखने को मिले, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
मुख्यमंत्री की दो-टूक: “फाइलें दबाने वाले अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे” सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘CM A+ श्रेणी’ के लंबित मामलों की खुद मॉनिटरिंग की। जब उनके सामने आया कि नीतिगत फैसलों, जनता से जुड़ी बड़ी योजनाओं और बजट आवंटन से संबंधित 821 फाइलें/नोटशीट कछुआ गति से आगे बढ़ रही हैं या अधिकारियों के स्तर पर लंबित हैं, तो उन्होंने मुख्य सचिव (CS) सहित सभी विभागीय प्रमुखों को तलब कर लिया। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में दो-टूक निर्देश दिए कि फाइलों को दबाने की यह लेती-देती और सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तत्काल सभी लंबित नोटशीटों पर अंतिम निर्णय लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।
मंत्रालय में ‘नाइट शिफ्ट’: देर रात तक जलती रहीं बत्तियां, जारी हुए ताबड़तोड़ आदेश मुख्यमंत्री की इस अभूतपूर्व सख्ती का असर यह हुआ कि वल्लभ भवन (मंत्रालय) और विभिन्न संचालनालयों में देर रात तक अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें अटकी रहीं। सामान्य तौर पर शाम को बंद होने वाले दफ्तरों में आधी रात तक लाइटें जलती रहीं और वरिष्ठ अधिकारी खुद अपनी टेबल पर बैठकर एक-एक नोटशीट का निपटारा करते नजर आए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से मिल रहे सीधे दबाव के चलते विभागों के बीच समन्वय की बाधाएं मिनटों में दूर की गईं। परिणाम स्वरूप, गुरुवार-शुक्रवार की पूरी रात मंत्रालय से अटकी हुई योजनाओं की स्वीकृतियों, महत्वपूर्ण नियुक्तियों और प्रशासनिक स्वीकृतियों के ताबड़तोड़ आदेश डिजिटल सिग्नेचर के साथ जारी होते रहे।
लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज; विभागों की बनेगी ‘परफॉर्मेंस शीट’ सचिवालय के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इस कार्रवाई के बाद भी रुकने वाले नहीं हैं। अब सीएमओ स्तर पर एक विशेष ‘परफॉर्मेंस ट्रैक’ तैयार किया जा रहा है, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि किस आईएएस (IAS) या राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की टेबल पर यह ‘A+ श्रेणी’ की नोटशीट कितने दिनों तक बिना किसी ठोस कारण के लंबित रही। मुख्यमंत्री के इस आक्रामक रुख से साफ संदेश गया है कि ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) को अब जनप्रतिनिधियों और सरकार के फैसलों को लटकाने की आजादी नहीं होगी। आने वाले दिनों में कुछ बड़े अधिकारियों के विभागों में फेरबदल की गाज भी गिर सकती है।












