प्रदेश में नाबालिगों से दुष्कर्म के बढ़ते मामलों को लेकर विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के एक विधायक ने सरकार से सीधे तौर पर सवाल किया कि आखिर इन मामलों में न्याय कब और कैसे मिलेगा। विधायक ने कहा कि प्रदेश में मासूम बच्चियों के साथ हो रहे अपराध समाज के लिए शर्मनाक हैं और सरकार केवल आंकड़ों में जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
विधायक ने सदन में कहा कि दुष्कर्म के मामलों में न सिर्फ सख्त कानून की जरूरत है, बल्कि त्वरित जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द सजा सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि अब तक कितने मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई और कितने मामलों में पीड़ित परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। मंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों में त्वरित एफआईआर, मेडिकल जांच और चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों की निगरानी की जा रही है।
सरकार ने यह भी दावा किया कि पिछले वर्षों की तुलना में अब मामलों में तेजी से कार्रवाई और सजा की दर में सुधार हुआ है। हालांकि विपक्ष ने सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि ज़मीनी हकीकत आंकड़ों से अलग है।
नाबालिगों से दुष्कर्म का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी घमासान होने के आसार हैं।















