मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। निर्वाचन अधिकारी (RO) द्वारा नामांकन खारिज किए जाने के बाद से ही कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनैतिक और कानूनी रस्साकशी चरम पर है। सड़कों पर तीखे विरोध-प्रदर्शन और नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) के घेराव के बाद, अब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है। शीर्ष अदालत इस मामले में तत्काल सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है।
निर्वाचन आयोग में प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
इससे पहले, कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में ‘निर्वाचन सदन’ के बाहर धरना प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर नामांकन बहाली की मांग की थी। वहां से कोई त्वरित राहत न मिलने पर वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी व विवेक तन्खा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ इस महत्वपूर्ण याचिका पर कल यानी 12 जून (शुक्रवार) को विशेष सुनवाई करेगी।
क्या है पूरा विवाद और कांग्रेस का दावा?
दरअसल, भाजपा नेता राहुल कोठारी की आपत्ति के बाद निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि उन्होंने तेलंगाना के एक पुराने मामले में मिले कोर्ट समन की जानकारी अपने शपथ पत्र (फॉर्म 26) में छिपाई थी। इसे कांग्रेस ने “लोकतंत्र की हत्या” और एक सोची-समझी राजनैतिक साजिश करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की दलील है कि नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) या आपराधिक मुकदमा लंबित नहीं है, बल्कि वह केवल एक मानहानि/मुआवजे से जुड़े नोटिस का जवाब दे रही थीं। इस तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। कल सुप्रीम कोर्ट से आने वाला फैसला ही मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट का भविष्य तय करेगा।

















