भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2026 में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) ने वैश्विक ऊर्जा समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस डील के बाद रूस के लिए भारतीय बाजार में अपना दबदबा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे राष्ट्रपति पुतिन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और रूस द्वारा उठाए जा रहे कदमों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और रूसी तेल का संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए समझौते के तहत भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात को सीमित करने या धीरे-धीरे बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% के भारी टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है।
रूस के लिए मुख्य चुनौतियां:
- बाजार हिस्सेदारी में गिरावट: 2024-25 में भारत अपनी जरूरत का लगभग 30-40% तेल रूस से ले रहा था। अब अनुमान है कि यह गिरकर 10-15% तक आ सकता है।
- अमेरिकी दबाव: ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, तो 25% का दंडात्मक शुल्क (Penal Tariff) फिर से लागू कर दिया जाएगा।
पुतिन की टेंशन कम करने के लिए रूस के ‘3 बड़े कदम’
भारत को अपने साथ जोड़े रखने और तेल की बिक्री जारी रखने के लिए रूस अब “आर-पार” की रणनीति अपना रहा है:
- भारी छूट (Deep Discounts): रूस अब भारत को ब्रेन्ट क्रूड की तुलना में और भी अधिक डिस्काउंट देने की पेशकश कर रहा है। रूस का लक्ष्य है कि तेल इतना सस्ता कर दिया जाए कि भारत के लिए अमेरिकी तेल की तुलना में रूसी तेल को छोड़ना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा हो जाए।
- चीनी बाजार पर निर्भरता: भारत से कम हो रहे निर्यात की भरपाई के लिए रूस अपना ध्यान पूरी तरह चीन की ओर मोड़ रहा है। रूस ने चीन को रियायती दरों पर अतिरिक्त तेल की आपूर्ति शुरू कर दी है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ हो रहा है।
- अनौपचारिक माध्यम और वैकल्पिक पेमेंट: रूस भारत के साथ व्यापार जारी रखने के लिए डॉलर के बजाय रुपया-रुबल या अन्य मुद्राओं में भुगतान और ‘शैडो फ्लीट’ (बिना बीमा वाले टैंकरों) के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी निगरानी से बचा जा सके।
क्या भारत रूस से तेल पूरी तरह बंद कर देगा?
विशेषज्ञों और भारतीय रिफाइनरियों (जैसे IOCL, BPCL) के अनुसार, यह बदलाव रातों-रात नहीं होगा:
- मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स: अगले 8-10 हफ्तों के लिए रूसी तेल के ऑर्डर पहले ही बुक हो चुके हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘ऊर्जा सुरक्षा’ सर्वोपरि है। भारत तेल के स्रोतों में विविधता लाएगा (अमेरिका, गुयाना, ब्राजील), लेकिन रूस के साथ अपने “विशेष रणनीतिक संबंधों” को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा।

















