देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और हालिया प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और प्रादेशिक मुख्यालयों पर आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने चार सबसे ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों को रेखांकित करते हुए सत्तापक्ष पर तीखे राजनीतिक बाण चलाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कूटनीतिक कोशिशें कर रही है।
ये हैं वो 4 ‘ज्वलंत मुद्दे’ जिन पर कांग्रेस ने घेरा:
1. नीट (NEET) परीक्षा विसंगतियां और युवाओं का भविष्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने एनटीए (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं और विशेष रूप से नीट री-एग्जाम (NEET Re-exam) को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने और ठेके पर पेपर छपवाने के कारण देश के करोड़ों होनहार छात्रों का भविष्य अंधकार में लटक गया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सीधे शीर्ष नेतृत्व से जवाबदेही तय करने और कड़े कानून बनाने की मांग की है।
2. मध्य प्रदेश में कथित जमीन सौदे (Ujjain Land Allegations) मध्य प्रदेश कांग्रेस और केंद्रीय नेतृत्व ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में विकास परियोजनाओं के आसपास हुई बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला उठाया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग कर अग्रिम निर्णयों की जानकारी के आधार पर निजी लाभ कमाया गया है। पार्टी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग रखी है।
3. संविधान, आरक्षण और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस महासचिवों ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा शासित राज्यों और देश की राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोली। इसके साथ ही, विपक्ष ने यह आरोप भी दोहराया कि भाजपा का वास्तविक एजेंडा संविधान में संशोधन कर पिछड़े और शोषित वर्गों (SC, ST और OBC) के आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त करना और परिसीमन (Delimitation) की आड़ में राजनीतिक लाभ उठाना है।
4. चरमराती अर्थव्यवस्था, एनपीए (NPA) और जनधन खातों की सच्चाई आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह व्यक्तिवादी विदेश नीति और घरेलू निवेशकों के डगमगाते भरोसे की शिकार हो चुकी है। पार्टी प्रवक्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) का ग्राफ 10% से ऊपर निकल चुका है और करोड़ों जनधन खाते या तो निष्क्रिय पड़े हैं या उनमें न्यूनतम राशि भी मौजूद नहीं है।
“सड़कों से लेकर संसद तक लड़ेंगे लड़ाई”
कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अपने आगामी आक्रामक रोडमैप की घोषणा की। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन चार मुख्य बिंदुओं पर श्वेत पत्र (White Paper) जारी नहीं करती है और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देती है, तो आगामी 15 जुलाई से मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में जिला स्तर पर व्यापक ‘कलेक्ट्रेट घेराव’ और ‘सीएम हाउस घेराव’ जैसे ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन शुरू किए जाएंगे। इस मुद्दे को आगामी विधानसभा और संसद सत्रों में भी पूरी ताकत से उठाया जाएगा।












