कानून व्यवस्था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने एक बेहद तल्ख और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के माननीय जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पुलिस द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग और आम नागरिकों के उत्पीड़न पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए जस्टिस जामदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को सरकार या प्रशासन का गुलाम नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने और कानून को ताक पर रखने वाले पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
क्या है पूरा मामला और अदालत की तल्ख टिप्पणी? न्यायालय में पुलिस की ज्यादती और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के की गई दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी। मामले के तथ्यों को देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने अपनी शक्तियों की सीमा लांघकर नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन किया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने कानून के शासन (Rule of Law) की याद दिलाते हुए कहा:
“भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ संविधान ने हर नागरिक को स्वतंत्रता और सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। पुलिस या प्रशासन यह न भूले कि वे जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं। नागरिकों को किसी भी स्थिति में सरकार का गुलाम बनने पर मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही कानून का डर दिखाकर उनका उत्पीड़न किया जा सकता है।”
दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और जवाबदेही तय करने के निर्देश हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (विभागीय प्रमुखों) को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर भविष्य में किसी भी नागरिक के साथ इस तरह का अनुचित और अवैध व्यवहार पाया गया, तो अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी। जस्टिस जामदार ने आदेश दिया कि कानून का उल्लंघन करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू की जाए और उनकी जवाबदेही तय की जाए।
अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पुलिस बल को संवेदनशील बनाया जाए, ताकि वे आम जनता के साथ कानून के दायरे में रहकर मानवीय गरिमा के अनुरूप व्यवहार करें। हाई कोर्ट के इस सख्त रुख से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं आम जनता ने अदालत के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है।












