मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में ‘विश्व सिकल सेल दिवस’ (World Sickle Cell Day) के अवसर पर एक ऐतिहासिक और गरिमामय राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। इस महा-समारोह का शुभारंभ देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य अंचलों में स्वास्थ्य सुधार और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के समूल नाश के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में देश और प्रदेश के कई वरिष्ठ राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के नागरिक शामिल हुए।
जनजातीय स्वास्थ्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा यह महा-अभियान समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया से देश के जनजातीय भाई-बहनों को मुक्त कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व प्रयासों और स्वास्थ्य जांच कैंपों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन’ को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश के सभी प्रभावित जिलों में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग (Screening) की जा रही है और मरीजों को जेनेटिक स्टेटस कार्ड बांटे जा रहे हैं ताकि भविष्य में इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।
ओंकारेश्वर की पावन धरा से देश को दिया गया बड़ा संदेश इस राज्य स्तरीय समारोह के लिए ओंकारेश्वर का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र सीधे तौर पर निमाड़ और मालवा के जनजातीय क्षेत्रों को जोड़ता है। कार्यक्रम के दौरान सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने वाले विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल क्लीनिकों का भी प्रदर्शन किया गया। सरकार ने संकल्प दोहराया कि वर्ष 2047 तक भारत से सिकल सेल एनीमिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा, जिसकी शुरुआत मध्य प्रदेश के हर गांव और हर घर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाकर की जा रही है।

















