मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित और राजनैतिक रूप से बेहद संवेदनशील ओबीसी (OBC) आरक्षण मामले में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) की मुख्य खंडपीठ में आज दोपहर 2:30 बजे से इस महा-मुद्दे पर एक बार फिर मैराथन और अंतिम सुनवाई (Final Hearing) शुरू होने जा रही है। लंबे समय से कानूनी दांव-पेंचों में उलझे इस मामले पर पूरे प्रदेश के युवाओं, सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों और राजनैतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि कोर्ट के फैसले से राज्य की सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं का भविष्य तय होगा।
14% बनाम 27% आरक्षण का कानूनी पेंच दरअसल, यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले के बाद शुरू हुआ था। इस फैसले के खिलाफ और पक्ष में हाईकोर्ट में लगभग 60 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं। सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि सरकार का पक्ष है कि प्रदेश में ओबीसी आबादी के बड़े हिस्से को देखते हुए यह आरक्षण पूरी तरह तर्कसंगत और संवैधानिक है।
महाधिवक्ता और दिग्गज वकीलों की फौज आमने-सामने आज दोपहर ढाई बजे विशेष रूप से नियत की गई इस सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता (Advocate General) और उनकी लीगल टीम कोर्ट के सामने ओबीसी की जातिगत और आर्थिक स्थिति से जुड़े पुख्ता आंकड़े पेश करेगी। वहीं, विपक्ष और याचिकाकर्ताओं की ओर से भी देश के दिग्गज वकीलों के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के साथ जिरह करने की उम्मीद है। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे रोजाना या लगातार सुनवाई (Day-to-Day Hearing) के मोड पर ले जा सकती है, ताकि जल्द से जल्द किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचा जा सके।

















