देश के ‘चीता स्टेट’ के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके मध्य प्रदेश के नाम एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ने जा रहा है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर-नीमच के गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब सागर-दमोह-नरसिंहपुर जिलों में फैले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही अभयारण्य) को देश में चीतों के तीसरे स्थायी और प्राकृतिक आवास (Third Cheetah Home) के रूप में विकसित कर लिया गया है।
आगामी 7 अक्टूबर 2026 को कूनो नेशनल पार्क से एक नर और मादा चीते (चीता पेयर) को सड़क/विशेष वाहन मार्ग से नौरादेही लाकर विशेष रूप से तैयार किए गए सॉफ्ट-रिलीज बाड़े (Soft Release Boma) में छोड़ा जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और मध्य प्रदेश वन विभाग ने इस महत्वपूर्ण ट्रांसलोकेशन की सभी तकनीकी, चिकित्सीय और सुरक्षा तैयारियां पूरी कर ली हैं।
क्यों चुना गया नौरादेही? (विशाल घास के मैदान और प्रचुर प्रे-बेस)
कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या और एक ही जगह आबादी केंद्रित होने (Overcrowding) के जोखिम को कम करने के लिए नौरादेही को आदर्श स्थल माना गया है:
- विशाल भूभाग और प्राकृतिक घास मैदान: विंध्य पर्वतमाला और नर्मदा बेसिन के बीच लगभग 1,197 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में चीतों के दौड़ने और शिकार करने के लिए अनुकूल विशाल सवाना शैली के घास के मैदान (Grasslands) मौजूद हैं।
- शिकार (Prey-Base) की प्रचुर उपलब्धता: वन विभाग ने पिछले दो वर्षों में चीतों के भोजन के लिए चीतल, सांभर, नीलगाय और चौसिंगा की संख्या में भारी वृद्धि की है। अन्य अभयारण्यों से भी सैकड़ों चीतल यहां शिफ्ट किए जा चुके हैं।
- तैयार किया गया हाई-टेक बाड़ा: चीतों को शुरुआती कुछ हफ्तों तक निगरानी में रखने के लिए नौरादेही के कोर एरिया में सोलर फेंसिंग और सीसीटीवी कैमरों से लैस विशेष ‘बोमा’ तैयार किया गया है, ताकि वे नए भौगोलिक वातावरण और तापमान के अनुकूल ढल सकें।
कूनो से 7 अक्टूबर को होगा सफर: पशु चिकित्सकों की निगरानी
कूनो नेशनल पार्क के विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों के इस जोड़े के स्वास्थ्य परीक्षण और रेडियो कॉलरिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है:
- विशेष रेस्क्यू वाहन से स्थानांतरण: ट्रांसलोकेशन के दौरान चीतों के तनाव को कम रखने के लिए विशेष वातानुकूलित एंबुलेंस और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम साथ रहेगी।
- सैटेलाइट कॉलर से 24×7 ट्रैकिंग: नौरादेही के जंगलों में छोड़ने के बाद वन अमले की समर्पित ‘चीता ट्रैकर टीम’ जीपीएस और सैटेलाइट सिग्नलों के जरिए 24 घंटे उनकी गतिविधियों, शिकार और स्वास्थ्य पर नजर रखेगी।
बुंदेलखंड में पर्यटन और रोजगार को लगेंगे पंख
नौरादेही में चीतों के पुनर्वास से बुंदेलखंड और महाकोशल अंचल में ईको-टूरिज्म को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा:
- पर्यटन सर्किट का विस्तार: खजुराहो, पन्ना टाइगर रिजर्व, नौरादेही और बांधवगढ़ को जोड़कर एक विशाल ‘वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट’ विकसित होगा।
- स्थानीय रोजगार के अवसर: चीतों के आगमन से आसपास के ग्रामीण और जनजातीय युवाओं के लिए गाइड, होमस्टे संचालन, सफारी वाहन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में आजीविका के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।
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