देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विपक्षी दलों के बढ़ते हमलों के बीच नौकरशाही से एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) आर. संथान गोपालन ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होते ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन कर दिया है।
गोपालन की सेवा के अभी लगभग 18 महीने बाकी थे और उनका नियमित रिटायरमेंट जून 2028 में प्रस्तावित था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वीआरएस लेने का उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से है और इसका एसआईआर पर चल रहे राजनीतिक विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
“25 साल की सेवा पूरी, अब परिवार पर ध्यान”: गोपालन की सफाई
अचानक वीआरएस के फैसले पर उठ रहे सवालों के बीच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आर. संथान गोपालन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है:
- व्यक्तिगत कारणों का हवाला: उन्होंने कहा, “मैं विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत कारणों से वीआरएस लेना चाहता हूं। मैं अपने परिवार और निजी मामलों पर ध्यान देना चाहता हूं। जब तक मेरे बेटे की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं हो जाती, मैं भुवनेश्वर में ही रहूंगा।”
- एसआईआर खत्म होने का इंतजार: उन्होंने खुलासा किया कि वे पिछले कई महीनों से सेवा छोड़ने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इस फैसले को राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने और संशोधित मतदाता सूची के औपचारिक प्रकाशन तक टाल रखा था।
- 25 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण: विपक्ष द्वारा इस्तीफे की मांग के सवाल पर उन्होंने कहा, “यदि वे खुश होना चाहते हैं, तो उन्हें खुश होने दें। मैंने 2 सितंबर को सरकारी सेवा में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और नियमानुसार वीआरएस के लिए आवेदन किया है।”
क्यों विवादों में था ओडिशा का SIR? (17 से 27 लाख नाम कटने का आरोप)
गोपालन के वीआरएस का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि ओडिशा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ था:
- 21 सितंबर को प्रकाशित हुई थी सूची: 3.16 करोड़ मतदाताओं वाली ओडिशा की अंतिम संशोधित मतदाता सूची 21 सितंबर को प्रकाशित की गई थी।
- विपक्ष के गंभीर आरोप: राज्य के प्रमुख विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने सूची से करीब 17 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर तीखा ऐतराज जताया था। बीजद ने आरोप लगाया था कि एसआईआर के दौरान 27.50 लाख से अधिक वैध मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने आंकड़ों में हेरफेर की।
राष्ट्रीय विवाद और चुनाव आयोग में मतभेद की टाइमिंग
गोपालन का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर टकराव चरम पर है:
- चुनाव आयुक्तों की असहमति की खबरें: हाल ही में यह रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में आयोग के कई नीतिगत फैसलों (जैसे फॉर्म-6 में संशोधन, वोटर हटाने की अपीलों और कामकाज के केंद्रीकरण) पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
- संसद से सड़कों तक संग्राम: विपक्षी दलों का ‘INDIA’ गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है और 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी मार्च के साथ 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के घेराव का ऐलान कर चुका है।
- ओडिशा में अफसरों के VRS का सिलसिला: ओडिशा कैडर में वरिष्ठ अधिकारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सितंबर की शुरुआत में भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा (आईपीएस) और पूर्व में चर्चित आईएएस वी.के. पांडियन भी वीआरएस ले चुके हैं।
देश की चुनावी व्यवस्था, निर्वाचन आयोग के विवादों, प्रशासनिक फेरबदल और हर निष्पक्ष व प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।












