मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर चल रहे सियासी संग्राम के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा किसी वैध नागरिक का “एक भी वोट मिटाना ‘वोट चोरी’ के दायरे में आता है और आज पूरा देश इस संगठित वोट चोरी के खिलाफ गहरे गुस्से में है।”
विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की नई दिल्ली में संपन्न हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि सड़कों से लेकर संसद और अदालतों तक जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगा।
“एक वोट मिटाना भी वोट चोरी, लोकतंत्र किसी पद से बड़ा” — राहुल गांधी
प्रेस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और प्रशासनिक मशीनरी पर संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करने का आरोप लगाया:
- एक-एक वोट का हिसाब: राहुल गांधी ने कहा, “यदि किसी पात्र नागरिक का नाम जानबूझकर मतदाता सूची से गायब किया जाता है, तो वह प्रक्रियागत चूक नहीं बल्कि सीधे तौर पर वोट की चोरी है। चाहे वह एक वोट हो या करोड़ों, यह जनादेश को चुराने का आपराधिक षड्यंत्र है।”
- जवाबदेही होगी तय: उन्होंने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे संवैधानिक कुर्सी या सत्ता की आड़ में बैठकर भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं, वे मुगालते में हैं। भारतीय लोकतंत्र किसी भी व्यक्ति या संस्थागत पद से कहीं अधिक बड़ा है। इस धांधली में शामिल हर जिम्मेदार की जवाबदेही तय की जाएगी और उन्हें कानून के दायरे में सजा दिलाई जाएगी।
- युवाओं और जनता में असंतोष: नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि देश की जागरूक जनता, विशेषकर नौजवान, अब इस बात को भली-भांति समझ चुके हैं कि उनके भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है।
किन मुद्दों पर घिरे हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने रखे गए हैं:
- SIR और मतदाता सूची से नाम कटना: विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लाखों-करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के काट दिए गए हैं।
- आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद की खबरें: हाल ही में सामने आई उन रिपोर्ट्स ने मामले को और हवा दे दी, जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर आंतरिक स्तर पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिससे विपक्ष को आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का सीधा मौका मिल गया।
- पारदर्शिता पर चुप्पी: 100% वीवीपैट पर्चियों के मिलान, डिजिटल डेटा सुरक्षा और ईवीएम पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग द्वारा विपक्ष को संतोषजनक जवाब न देना।
विपक्ष का अगला कदम: 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी संग्राम
राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के घटक दलों ने चुनाव आयोग को घेरने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार की है:
- 2 से 8 अक्टूबर: देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और प्रदर्शन।
- 6 अक्टूबर: सभी विपक्षी सांसदों द्वारा संसद से केंद्रीय निर्वाचन आयोग (निर्वाचन सदन) तक पैदल मार्च और घेराव।
- राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग: विपक्षी नेताओं का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ औपचारिक ज्ञापन सौंपेगा।
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