मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और जलभराव के दौर के बाद अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भोपाल केंद्र के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय वेदर सिस्टम कमजोर पड़ चुका है और सोमवार, 28 सितंबर 2026 से बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी एक सप्ताह के भीतर राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई शुरू हो जाएगी।
राहत की बात यह है कि आगामी चार दिनों तक प्रदेश के किसी भी जिले में भारी या अति भारी बारिश की कोई चेतावनी (अलर्ट) जारी नहीं की गई है। मंगलवार से विशेष रूप से उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभागों में मौसम पूरी तरह साफ होगा और तेज धूप खिलेगी।
कमजोर हुआ सिस्टम: दो-तीन दिनों में आधे से ज्यादा एमपी में खिलेगी धूप
मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आए डीप डिप्रेशन का प्रभाव अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है:
- सोमवार से सक्रियता कम: सोमवार से सिस्टम के शिथिल होने से बादलों की मौजूदगी कम होगी और कई जिलों में हल्की धूप निकलनी शुरू हो जाएगी। केवल स्थानीय नमी के कारण कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
- मंगलवार से तीखी धूप: 29 और 30 सितंबर से राज्य के आधे से अधिक हिस्से में आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा। मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल अंचल (नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, इंदौर, झाबुआ, धार, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, श्योपुर, मुरैना व भिंड) में अच्छी धूप खिलने से दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सीजन का कोटा: अब तक 95.8% बारिश दर्ज, सामान्य की श्रेणी में एमपी
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में चालू मानसून सत्र का बारिश रिकॉर्ड इस प्रकार रहा है:
- औसत बारिश: प्रदेश में रविवार तक औसतन 37.7 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि मौसमी कोटे (Seasonal Quota) का लगभग 95.8 प्रतिशत है।
- पूर्वी बनाम पश्चिमी संभाग: पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग) में औसत से करीब 4% अधिक बारिश हुई है। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे कुछ जिलों में सामान्य से 2% से लेकर 20% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।
- मानसून का उतार-चढ़ाव: जून के महीने में राज्य में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई में स्थिति सुधरी लेकिन दो बार लंबे ‘मानसून ब्रेक’ लगे। अंत में सितंबर के तीसरे और चौथे हफ्ते में सक्रिय हुए गहरे अवदाब ने कई बांधों के गेट खुलवाए और घाटे की भरपाई की।
विदाई की परिस्थितियां अनुकूल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत और राजस्थान के हिस्सों से मानसून पहले ही विदा हो चुका है। अब मध्य भारत के वायुमंडल के निचले स्तर पर एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन (प्रति-चक्रवात) बनने और हवाओं में नमी घटने के संकेत मिल रहे हैं। जैसे ही अगले 5 दिनों तक शुष्क मौसम बना रहेगा, मध्य प्रदेश से मानसून की वापसी की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
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