बिहार पुलिस के सर्वोच्च पद (DGP) की कमान संभाल रहे 1991 बैच के वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी विनय कुमार ने पुलिस महकमे को अलविदा कहकर एक नए प्रशासनिक अध्याय की शुरुआत की है। दिसंबर 2026 में निर्धारित सेवा विस्तार से करीब तीन माह पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें विधिवत राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त (State Chief Information Commissioner – CIC) नियुक्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय चयन समिति—जिसमें नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ मंत्री शामिल थे—की सहमति के बाद राज्यपाल के अनुमोदन से इस आशय की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। त्रिपुरारी शरण का कार्यकाल पूरा होने के बाद से यह पद रिक्त चल रहा था।
खाकी से संवैधानिक आयोग: अब क्या होंगी मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नई जिम्मेदारियां?
पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस बल के संचालन का नेतृत्व करने के बाद, अब विनय कुमार के कंधों पर राज्य में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ (RTI Act) को प्रभावी ढंग से लागू कराने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की वैधानिक जिम्मेदारी होगी:
- राज्य सूचना आयोग का सर्वोच्च नेतृत्व: मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में वे बिहार राज्य सूचना आयोग की सभी पीठों (Benches), सूचना आयुक्तों और आयोग के प्रशासनिक कार्यों का समग्र पर्यवेक्षण और नेतृत्व करेंगे।
- द्वितीय अपीलों (Second Appeals) की सुनवाई व निपटारा: सरकारी विभागों (लोक प्राधिकरणों) द्वारा नागरिकों को सूचना न देने, अधूरी जानकारी देने या तय समय सीमा में आवेदन खारिज करने के मामलों में आयोग सर्वोच्च अपीलीय मंच है। विनय कुमार विभिन्न विभागों से संबंधित द्वितीय अपीलों और शिकायतों की न्यायिक सुनवाई करेंगे।
- लापरवाह अफसरों पर जुर्माना (Penalties): आरटीआई कानून के तहत यदि कोई जनसूचना अधिकारी (PIO) जानबूझकर जानकारी छिपाता है, भ्रामक उत्तर देता है या तय समय (30 दिन) में जानकारी उपलब्ध नहीं कराता है, तो मुख्य सूचना आयुक्त को ₹250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाने और विभागीय जांच की सिफारिश करने का अधिकार होता है।
- डिजिटल फाइलिंग और बैकलॉग खत्म करना: राज्य सूचना आयोग में हजारों लंबित आरटीआई मामलों (Pending Cases) का अंबार है। आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले विनय कुमार से उम्मीद की जा रही है कि वे आयोग की प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाकर वर्षों से अटकी अपीलों का तेजी से निपटारा करेंगे।
- स्वतः संज्ञान (Suo Motu Disclosure – Section 4): सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए आरटीआई की धारा 4 के तहत विभागों द्वारा अपनी योजनाओं, खर्चों और टेंडरों की जानकारी सार्वजनिक डोमेन/वेबसाइट पर स्वतः उपलब्ध कराने के नियमों का कड़ाई से पालन कराना भी उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल होगा।
विनय कुमार का प्रशासनिक सफरनामा: IITian से DGP और अब CIC
वैशाली जिले के मूल निवासी विनय कुमार का करियर तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए जाना जाता है:
- आईआईटी से सिविल सेवा: प्रारंभिक शिक्षा गांव से पूरी करने के बाद उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से बी.टेक की डिग्री ली। 1991 में वे आईपीएस के लिए चयनित हुए।
- पुलिसिंग में लंबा अनुभव: अपने सेवाकाल में वे विभिन्न जिलों के एसपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर), सीआईडी प्रमुख और बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
- डीजीपी के रूप में कार्यकाल: आलोक राज के बाद उन्होंने राज्य पुलिस बल की कमान संभाली थी और आधुनिक पुलिसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में अहम योगदान दिया।
विनय कुमार के वीआरएस लेने के बाद डीजी होमगार्ड व फायर सर्विसेज प्रीता वर्मा को फिलहाल डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि पूर्णकालिक नए डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
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