देश की सबसे तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और कैशलेस लेनदेन के मॉडल शहर इंदौर में बुधवार, 23 सितंबर को व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ अभूतपूर्व मोर्चा खोल दिया है। उच्च मूल्य वाले यूपीआई (UPI) लेन-देन पर प्रस्तावित ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) और अतिरिक्त शुल्कों के विरोध में शहर के 125 से अधिक प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) मनाया। शहर के करीब 2 लाख खुदरा और थोक व्यापारियों ने दिनभर ग्राहकों से यूपीआई के जरिए ऑनलाइन भुगतान लेने से पूरी तरह इनकार कर दिया।
विरोध को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए शहरभर के बाजारों में दुकानों पर रखे क्यूआर कोड (QR Code) स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढक दिया गया।
अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स का आह्वान, प्रमुख बाजारों का मिला समर्थन शहर के शीर्ष व्यापारिक निकाय ‘अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल को व्यापक समर्थन मिला:
- प्रमुख बाजार हुए शामिल: सराफा, कपड़ा मार्केट (क्लॉथ मार्केट), थोक किराना बाजार सियागंज, मारोठिया, अनाज व दाल मिल एसोसिएशन, प्लाईवुड कारोबारियों सहित मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस मुहिम को खुला समर्थन दिया है।
- लाखों ग्राहक प्रभावित: इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के अनुसार, पोस्टर, सोशल मीडिया और कॉल सेंटर के जरिए व्यापारियों और उपभोक्ताओं को जागरूक किया गया। एक दिन में करीब 10 लाख ग्राहकों का लेन-देन प्रभावित होने का अनुमान है।
व्यापारियों के विरोध की मुख्य वजह क्या है? अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और व्यापारी प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार व वित्तीय संस्थाओं के प्रस्तावित नियमों पर गंभीर चिंताएं जताई हैं:
- कम मार्जिन वाले धंधों पर दोहरी मार: प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% तक एमडीआर (MDR) लगाने की योजना है। व्यापारियों का कहना है कि किराना, कपड़ा और खुदरा व्यापार पहले से ही 1 से 2 फीसदी के बेहद मामूली मुनाफे (Thin Margin) पर काम कर रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ सीधे उनकी आजीविका पर पड़ेगा।
- ‘डिजिटल इंडिया’ की मंशा के विपरीत: व्यापारियों का तर्क है कि पहले सरकार ने बैंकों की कतारों से निकालकर व्यापारियों और उपभोक्ताओं को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की आदत डाली, और अब जब पूरा बाजार इस पर निर्भर हो गया है, तो इसे ‘कमाई का जरिया’ बनाया जा रहा है। इससे व्यापारी दोबारा कैश लेनदेन की ओर लौटने पर मजबूर होंगे।
- पेट्रोल पंप संचालकों की चेतावनी: पेट्रोल डीलर्स का कहना है कि वे पहले से ही निर्धारित कमीशन पर काम करते हैं। यदि 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर चार्ज लगा, तो वे ईंधन खरीद पर यूपीआई स्वीकार करना पूरी तरह बंद कर देंगे।
भोपाल और अन्य जिलों में भी उठने लगी आवाज इंदौर से शुरू हुआ यह विरोध अब पूरे मध्य प्रदेश में फैलता दिख रहा है:
- भोपाल चैंबर ने की बैठक: भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी इस कदम की निंदा की है और केंद्र व राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर ली है।
- जीएसटी काउंसिल में प्रतिनिधित्व की मांग: व्यापारिक संगठनों की मांग है कि जब भी व्यापारियों और लेन-देन से जुड़े वित्तीय फैसले लिए जाएं, तो नीति-निर्माता मंचों और जीएसटी काउंसिल में व्यापारी प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन ‘यूपीआई’ तकनीक के खिलाफ नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों पर थोपे जा रहे अनुचित मर्चेंट शुल्कों के खिलाफ है। यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित शुल्कों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह विरोध राष्ट्रव्यापी रूप ले सकता है।
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