मध्य प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (हर घर नल-जल योजना) में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक और हैरान करने वाला मामला उजागर हुआ है। नवगठित मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में ठेकेदार ने अफसरों से सांठगांठ कर ₹3.85 करोड़ का शत-प्रतिशत भुगतान तो हासिल कर लिया, लेकिन धरातल पर 740 घरों में से एक भी घर में नल का कनेक्शन चालू नहीं हुआ। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर सरकारी धन का गबन करने के इस गंभीर मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के तीन तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि 9 महीने में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट में पांच साल बीत जाने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है और नवनिर्मित पानी की टंकी तक भरभरा कर ढह गई।
किन-किन पर गिरी गाज? EOW ने इन पर दर्ज किया केस ईओडब्ल्यू द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में प्रमाणित हुआ कि अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन और काम की गुणवत्ता परखे बिना ही ठेकेदार को पूरा भुगतान जारी कर दिया:
- जे.पी. द्विवेदी: तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE), पीएचई विभाग।
- संजय पांडे: तत्कालीन सहायक यंत्री (AE), पीएचई विभाग।
- ए.पी. तिवारी: तत्कालीन उपयंत्री (Sub-Engineer), पीएचई विभाग।
- शिवेंद्र कुमार तिवारी: संबंधित निर्माण एजेंसी/ठेकेदार।
जांच में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं वर्ष 2021 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत नईगढ़ी जनपद के कई गांवों में घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली:
- खटखरी में गिर गई नवनिर्मित पानी की टंकी: योजना के तहत खटखरी गांव में बनाई गई पानी की टंकी निर्माण के कुछ ही समय बाद गुणवत्ताहीन होने के कारण धराशायी हो गई।
- गांव के बाहर तक ही बिछाई पाइपलाइन: ठेकेदार ने मुख्य पाइपलाइन केवल गांव की सीमा (Outskirts) तक बिछाकर छोड़ दी। घरों के भीतर न तो नल के कनेक्शन दिए गए और न ही स्टैंड-पोस्ट बनाए गए।
- कराह गांव में 5 की जगह 1 मोटर मिली: कराह गांव में 740 घरों में जल आपूर्ति के नाम पर कागजों में 5 सबमर्सिबल मोटरें लगाना दर्ज था, लेकिन मौके पर जांच में केवल 1 मोटर ही पाई गई। 740 घरों में से किसी भी घर में नल की फिटिंग तक नहीं थी।
- अधूरे संपवेल और टंकी: शिवराजपुर और जुड़मनिया रघुनाथ गांवों में भी ओवरहेड टैंक और संपवेल अधूरे पाए गए, जबकि भुगतान शत-प्रतिशत पहले ही कर दिया गया था।
कागजों में ‘हर घर जल’, धरातल पर पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के दावों के बावजूद महिलाओं को आज भी पीने के पानी के लिए दूर-दराज के हैंडपंपों और कुओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारियों और ठेकेदार की इस मिलीभगत ने सरकार की जनकल्याणकारी मंशा को पलीता लगा दिया।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, दर्ज एफआईआर के आधार पर अब तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार की संपत्तियों, बैंक खातों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी फाइलों की गहन फॉरेंसिक व कानूनी पड़ताल की जा रही है, जिसके बाद जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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यह वीडियो रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे प्रदेश के कई हिस्सों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट बना हुआ है और लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं।












