मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल सीधी जिले से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और कथित लापरवाही का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। सांस लेने में गंभीर तकलीफ से जूझ रहे 6 वर्षीय विशेष संरक्षित जनजाति (PVTG) बैगा वर्ग के एक बच्चे की जिला अस्पताल रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में ही मौत हो गई। शोकाकुल परिजनों ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आपातकालीन स्थिति के बावजूद अस्पताल में बच्चे के साइज का ऑक्सीजन मास्क तक उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते मासूम को समय पर ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिल सका।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर विंध्य अंचल के ग्रामीण और सुदूर आदिवासी इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सांस लेने में हो रही थी परेशानी, CHC में नहीं मिला समुचित प्राथमिक उपचार परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, बच्चे को अचानक तेज बुखार और सीने में जकड़न के बाद सांस लेने में भारी तकलीफ शुरू हुई थी:
- सीएचसी पहुंचे परिजन: परिजन आनन-फानन में बच्चे को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी।
- ऑक्सीजन मास्क न होने का आरोप: परिजनों का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने ऑक्सीजन सिलेंडर तो दिखाया, लेकिन बच्चों के लिए जरूरी ‘पीडियाट्रिक ऑक्सीजन मास्क’ उपलब्ध नहीं था। इस वजह से बच्चे को स्थिर (stabilize) करने में काफी समय बर्बाद हुआ।
- आनन-फानन में रेफर: स्थानीय स्तर पर आपातकालीन सुविधा न होने पर चिकित्सकों ने बच्चे को गंभीर हालत में जिला अस्पताल सीधी के लिए रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
आदिवासी अंचलों में जीवनरक्षक उपकरणों का टोटा बैगा जनजाति बहुल इस अंचल में स्वास्थ्य व्यवस्था की यह त्रासदी कोई पहली घटना नहीं है:
- पीडियाट्रिक आईसीयू और किट का अभाव: ग्रामीण व ब्लॉक स्तर के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात और छोटे बच्चों के लिए जरूरी आपातकालीन किट, नेबुलाइजर और छोटे मास्क का नियमित स्टॉक न होना व्यवस्थागत खामी को दर्शाता है।
- एंबुलेंस में लाइफ सपोर्ट की कमी: रेफरल के दौरान जिस वाहन से मरीज को भेजा जाता है, उसमें प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और फंक्शनल लाइफ सपोर्ट सिस्टम का अभाव अक्सर क्रिटिकल मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है।
सीएमएचओ ने दिए जांच के निर्देश मामला तूल पकड़ने और स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है:
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) से स्पष्टीकरण तलब किया है और एक जांच दल गठित करने के निर्देश दिए हैं।
- स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का प्रारंभिक दावा है कि बच्चे की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी, हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया है कि ऑक्सीजन मास्क की अनुपलब्धता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई होगी।
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