लगातार सात बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर में उच्च शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के तक्षशिला परिसर (UTD) की जमीनी हकीकत हैरान करने वाली है। विश्वविद्यालय के खंडवा रोड स्थित इस विशाल परिसर में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पत्रकारिता, फार्मेसी, कंप्यूटर साइंस सहित करीब 28 प्रमुख अध्ययन शालाएं (University Teaching Departments) संचालित होती हैं, जहां रोजाना 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं, शोधार्थी और प्रोफेसर पहुंचते हैं। इसके बावजूद पूरे परिसर में एक सुव्यवस्थित और भूमिगत ड्रेनेज (सीवरेज व जल निकासी) नेटवर्क तक मौजूद नहीं है।
हल्की बारिश होते ही पूरा परिसर टापू में तब्दील हो जाता है, जिससे विभिन्न विभागों के मुख्य द्वारों और पार्किंग स्थलों पर गंदा पानी जमा रहता है।
सालों से खुले गड्ढों और कच्ची नालियों के सहारे निकासी यूनिवर्सिटी कैंपस में ड्रेनेज मास्टर प्लान का अभाव वर्षों से बना हुआ है:
- सेप्टिक टैंक और ओवरफ्लो की समस्या: विभागों में निकलने वाला गंदा पानी और सीवेज वर्षों पुराने सेप्टिक टैंकों और कच्ची नालियों के जरिए बहाया जाता है। बारिश के मौसम में ये टैंक ओवरफ्लो होकर रास्तों पर फैल जाते हैं।
- संक्रमण का खतरा: जलभराव और सीवेज जमाव के चलते विभागों के आसपास तीव्र दुर्गंध फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
- छात्रावासों की हालत बदतर: परिसर में स्थित छात्र-छात्राओं के हॉस्टल्स के आसपास निकासी का समुचित मार्ग न होने के कारण विद्यार्थियों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
स्मार्ट सिटी और नगर निगम से तालमेल का अभाव हैरानी की बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और इंदौर नगर निगम (IMC) के बीच समन्वय की कमी के चलते परिसर की मुख्य सीवरेज लाइन को शहर की ट्रंक सीवर लाइन से अब तक नहीं जोड़ा जा सका है:
- परिसर के बाहर सीवर, अंदर सन्नाटा: खंडवा रोड पर नगर निगम द्वारा मुख्य सीवरेज नेटवर्क बिछाया जा चुका है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा परिसर के अंदर का आंतरिक ड्रेनेज लेआउट तैयार न करने के कारण कनेक्शन नहीं हो सका।
- बजट और प्रस्ताव फाइलों में कैद: विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विंग द्वारा समय-समय पर ड्रेनेज लाइन बिछाने के प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन वित्तीय आवंटन और प्रशासनिक स्वीकृतियों की कछुआ चाल के कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
छात्र संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी परिसर की बदहाल स्थिति को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों और विद्यार्थियों ने विवि प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है:
- छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लाखों रुपये की फीस और विकास शुल्क तो नियमित रूप से वसूलता है, लेकिन बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
- प्रतिनिधियों ने कुलपति और कुलसचिव से मांग की है कि नगर निगम के सहयोग से परिसर में प्राथमिकता के आधार पर व्यापक ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाई जाए, अन्यथा छात्र तालाब बने रास्तों पर बैठकर सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे।
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