मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने लंबे समय से जारी कथित आर्थिक शोषण, लंबित एरियर्स और वेतन विसंगतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संयुक्त कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर 11 सितंबर को प्रदेश स्तर पर सांकेतिक प्रदर्शन (Symbolic Protest) किया जाएगा। प्रदर्शन के उपरांत कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल वल्लभ भवन (मंत्रालय) पहुंचकर मुख्य सचिव (Chief Secretary) के नाम विस्तृत मांगों का ज्ञापन सौंपेगा।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों द्वारा बार-बार दिए जा रहे केवल मौखिक आश्वासनों से मैदानी कर्मचारियों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
सांकेतिक प्रदर्शन और ज्ञापन की प्रमुख मांगें कर्मचारी संगठनों ने अपने आंदोलन के पहले चरण में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की रणनीति तय की है:
- वेतन विसंगति और समयमान वेतनमान: विभिन्न संवर्गों में वर्षों से लंबित वेतन विसंगतियों को दूर करने और पात्रतानुसार समयमान-वेतनमान का लाभ देने की मांग।
- महंगाई भत्ता (DA) और बकाया एरियर्स: केंद्र के समान देय महंगाई भत्ते के आदेश जारी करने और पूर्व के रुके हुए एरियर्स का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित करना।
- आउटसोर्स और संविदा कर्मियों का न्यूनतम वेतन: ठेका व आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को श्रम कानूनों के अनुसार सम्मानजनक मानदेय और समय पर भुगतान की गारंटी।
- कटौती और वसूली पर रोक: बिना ठोस प्रशासनिक आधार के कर्मचारियों के देयकों में की जा रही अघोषित कटौतियों को तुरंत बंद किया जाए।
‘यदि सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन होगा व्यापक’ कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 11 सितंबर का प्रदर्शन केवल सांकेतिक चेतावनी है। भोजन अवकाश (लंच आवर्स) या कार्य समाप्ति के समय विरोध दर्ज कर यह संदेश दिया जाएगा कि कर्मचारी अब अपने जायज हक के लिए चुप नहीं बैठेंगे।
यदि मुख्य सचिव स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बाद भी निर्धारित समय-सीमा में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर में कार्य बहिष्कार, क्रमिक अनशन और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने पर विवश होना पड़ेगा।
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