मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों (जूडा) का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शासन स्तर पर बातचीत बेनतीजा रहने और ठोस आदेश जारी न होने से नाराज डॉक्टरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) समेत प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं की जातीं और लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे ‘न हटेंगे और न झुकेंगे’।
डॉक्टरों के इस अडिग रुख के चलते राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ओपीडी और रूटीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं।
‘केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा’ प्रदर्शन स्थल पर जुटे जूनियर डॉक्टरों ने सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जूडा प्रतिनिधियों का कहना है कि वे महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याओं को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं:
- लिखित आदेश की मांग: डॉक्टरों का कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ोतरी, अस्पतालों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी के तय घंटों को लेकर आधिकारिक शासकीय आदेश (GO) जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
- आपातकालीन सेवाओं पर भी असर की चेतावनी: जूडा ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने दमनकारी नीति अपनाई या उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे इमरजेंसी और आईसीयू सेवाओं को भी पूरी तरह बंद करने पर विचार कर सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
अस्पतालों में भटक रहे मरीज, सीनियर डॉक्टरों पर बढ़ा दबाव जूनियर डॉक्टरों की निरंतर हड़ताल और अडिग रुख के कारण सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है:
- ओपीडी में लंबी कतारें: जूनियर डॉक्टरों के काम बंद रखने से सीनियर रेजिडेंट्स और कंसल्टेंट्स पर मरीजों का अत्यधिक दबाव आ गया है। ओपीडी में पर्ची कटवाने और डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
- ऑपरेशन टले: कई अस्पतालों में रूटीन सर्जरी टाल दी गई हैं, जिससे दूर-दराज के जिलों से इलाज कराने आए गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रशासन की नजर, गतिरोध सुलझाने की कवायद जारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के आला अधिकारी लगातार जूडा प्रतिनिधियों से संपर्क साधकर हड़ताल वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि जनता के स्वास्थ्य को बंधक बनाकर दबाव बनाना उचित नहीं है। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के अभाव में काम करना उनके जीवन और करियर के साथ खिलवाड़ है।
मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन के हर नए मोड़ और प्रामाणिक (Authentic) रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहें हमारी वेबसाइट के साथ।












