आधुनिक दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव के कारण कम उम्र में ही हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। इस गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि दैनिक दिनचर्या में सक्रिय जीवन शैली (Active Lifestyle) को अपनाकर इन जानलेवा बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हृदय और मस्तिष्क की धमनियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए महंगी दवाओं से ज्यादा जरूरी नियमित अनुशासन और शारीरिक सक्रियता है।
‘सिटिंग सिंड्रोम’ और शारीरिक निष्क्रियता पर जताई चिंता डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत (‘सिटिंग सिंड्रोम’) शरीर में रक्त संचार को धीमा करती है और मोटापे, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) तथा डायबिटीज जैसी समस्याओं को जन्म देती है:
- दैनिक व्यायाम की अनिवार्यता: उन्होंने प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तेज चाल में टहलने (ब्रिस्क वॉक), योग, साइकलिंग या किसी भी खेल गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
- रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण: नियमित व्यायाम से शरीर में ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ (HDL) बढ़ता है और धमनियों में ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया धीमी होती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा टल जाता है।
खानपान और मानसिक तनाव प्रबंधन के दिए सूत्र विशेषज्ञ ने स्वस्थ जीवन के लिए आहार और मानसिक शांति के संतुलन को भी महत्वपूर्ण बताया:
- संतुलित आहार: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, रिफाइंड तेल और जरूरत से ज्यादा नमक व चीनी के सेवन से परहेज करें। थाली में मौसमी हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त अनाज की मात्रा बढ़ाएं।
- तनाव और नींद: मानसिक तनाव से शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन्स का स्तर बढ़ता है, जो सीधे रक्तचाप और दिल की धड़कनों पर असर डालते हैं। पर्याप्त 7-8 घंटे की गहरी नींद और ध्यान (मेडिटेशन) तनाव घटाने में असरदार हैं।
- नशे से पूरी तरह दूरी: धूम्रपान, तंबाकू और शराब का अत्यधिक सेवन सीधे तौर पर रक्त नलिकाओं को संकरा और कमजोर बनाता है, जो स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बनता है।
समय पर स्क्रीनिंग और लक्षणों की पहचान जरूरी डॉ. श्रीवास्तव ने जोर देकर कहा कि 30 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपनी बुनियादी स्वास्थ्य जांच (लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर) अवश्य करानी चाहिए। यदि सीने में अचानक भारीपन, सांस फूलना, जबड़े या बाएं हाथ में दर्द, या चेहरे पर अचानक सुन्नता और बोलने में लड़खड़ाहट जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए निकटतम विशेषज्ञ अस्पताल में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर पहुंचना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
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