इंदौर संभाग के अंतर्गत धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के अधीन आने वाले ऐतिहासिक और प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने संभाग के कुल 24 मंदिरों (इंदौर जिले के 7 और धार जिले के 17 मंदिर) की समीक्षा बैठक करते हुए अगले 10 दिनों के भीतर सभी संपत्तियों, सोने-चांदी के आभूषणों और नकदी की इन्वेंट्री का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही, संभाग आयुक्त ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि वे आगामी 15 दिनों के भीतर मंदिर प्रबंधन समितियों की अनिवार्य बैठकें आयोजित कर वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
हर मंदिर में नियुक्त होगा प्रबंधक, दान का रखा जाएगा पाई-पाई का हिसाब बैठक के दौरान संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी:
- प्रबंधकों की नियुक्ति: संभागायुक्त की ओर से प्रत्येक मंदिर के लिए एक अधिकृत प्रबंधक (Manager) की नियुक्ति की जाएगी, जो दैनिक व्यवस्थाओं और वित्तीय गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होगा।
- दान और कीमती सामान का मूल्यांकन: मंदिरों को प्राप्त होने वाले नकद दान, आभूषणों और अन्य मूल्यवान उपहारों की विस्तृत इन्वेंट्री तैयार की जाएगी। दान सामग्री के वर्तमान बाजार मूल्य का वैज्ञानिक आकलन दर्ज कर उनके सुरक्षित रखरखाव की निर्धारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- दैनिक आय-व्यय व भूमि प्रबंधन: मंदिरों की दैनिक आय और व्यय का व्यवस्थित लेखा-जोखा रखने, श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने और मंदिर की कृषि व व्यावसायिक भूमियों के उचित प्रबंधन के आदेश दिए गए हैं।
मूल स्वरूप से छेड़छाड़ पर रोक, बिल्वामृतेश्वर मंदिर के कार्यों की समीक्षा प्रशासनिक बैठक में स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन, राजस्व उपायुक्त शैली कनाश, धार डिप्टी कलेक्टर निमिषा पांडे, एसडीएम निधि वर्मा और आईडीए अधिकारी कपिल भल्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
संभागायुक्त ने निर्देश दिया कि मंदिरों के जीर्णोद्धार या विकास कार्यों के दौरान उनके मूल पुरातात्विक और स्थापत्य स्वरूप (Architectural Character) से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा, धार जिले के धरमपुरी में नर्मदा नदी के मध्य स्थित ऐतिहासिक बिल्वामृतेश्वर मंदिर में वर्ष 2025 से जारी निर्माण व विकास कार्यों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तय समय-सीमा में पूरा करने की ताकीद की गई।
प्रशासन के इस सख्त रुख से मंदिरों के चढ़ावे, कीमती संपत्तियों और धार्मिक जमीनों पर अवैध कब्जे या हेराफेरी की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त होगी।
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