मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तकनीकी खराबी के चलते एक बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ एक बहुमंजिला आवासीय इमारत की पार्किंग में चार्जिंग पर लगाई गई एक इलेक्ट्रिक स्कूटी (E-Scooter) की बैटरी में अचानक जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट के साथ ही स्कूटी ने भीषण आग पकड़ ली, जिसने पल भर में पूरी बिल्डिंग की पार्किंग और सीढ़ियों को अपनी चपेट में ले लिया।
इस दर्दनाक हादसे में इमारत की ऊपरी मंजिल पर रहने वाली दो सगी बहनों की दम घुटने और झुलसने से मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, इमारत के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले करीब 50 से अधिक परिवार इस भीषण आग और जहरीले धुएं के बीच फंस गए, जिन्हें दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने खिड़कियों और छतों के रास्ते भारी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला।
आधी रात को हुआ धमाका; सीढ़ियों पर फैला जहरीला धुआं
चश्मदीदों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना देर रात करीब 2 बजे की है जब पूरी इमारत के लोग गहरी नींद में सो रहे थे।
- बैटरी ब्लास्ट: पार्किंग एरिया में चार्ज हो रही स्कूटी की लिथियम-आयन बैटरी ओवरहीटिंग के कारण अचानक बम की तरह फट गई। स्कूटी से भड़की आग ने पास खड़ी अन्य 10-12 गाड़ियों को भी अपनी लपेट में ले लिया, जिससे लपटें तेजी से ऊपर की मंजिलों की तरफ बढ़ने लगीं।
- फंस गए 50 परिवार: आग के चलते पूरी बिल्डिंग की बिजली गुल हो गई और सीढ़ियों वाले रास्ते में भयंकर काला व जहरीला धुआं भर गया। इमारत में निकासी का कोई दूसरा रास्ता (Emergency Exit) न होने के कारण 50 से अधिक परिवारों के करीब 150 लोग अपने-अपने फ्लैटों में ही कैद हो गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे।
खिड़की तोड़कर भागने की कोशिश में गई जान
इस हादसे में जान गंवाने वाली दोनों लड़कियों की पहचान 22 वर्षीय तान्या और 18 वर्षीय अंशिका के रूप में हुई है, जो अपनी मां के साथ तीसरी मंजिल पर रहती थीं।
चश्मदीदों के मुताबिक: “आग लगने के बाद दोनों बहनें डर गईं और धुएं से बचने के लिए उन्होंने फ्लैट का दरवाजा खोलकर सीढ़ियों की तरफ भागने का प्रयास किया। लेकिन सीढ़ियों पर आग की लपटें और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का दबाव इतना अधिक था कि वे वहीं बेहोश होकर गिर गईं और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। वहीं, उनकी मां ने समझदारी दिखाते हुए खुद को बालकनी में सुरक्षित कर लिया, जिससे उनकी जान बच गई।”
हाइड्रोलिक क्रेन से हुआ रेस्क्यू; घायलों का अस्पताल में इलाज जारी
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 6 गाड़ियां और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अग्निशमन दल ने तत्परता दिखाते हुए सबसे पहले हाइड्रोलिक क्रेन और सीढ़ियों की मदद से फ्लैटों की खिड़कियों और ग्रिल को कटर से काटा।
लगभग 4 घंटे चले इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद खिड़कियों और छत के रास्ते सभी 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। धुएं के कारण दम घुटने से बीमार हुए 12 से अधिक लोगों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या बिल्डिंग में फायर एनओसी (Fire NOC) और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था थी या नहीं। पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।












